स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मैं भी वहां जाना चाहता हूं, लेकिन अस्वस्थता के कारण फिलहाल नहीं जा पा रहा हूं। हालांकि, इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा आगे आ रहे हैं। मेरा मानना है कि वे अपने आप में नेता हैं और उन्हें पहचान मिलनी चाहिए। यह जरूरी नहीं है कि हर जगह अभिजीत ही आगे दिखे। जो छात्र जमीन पर मेहनत कर रहे हैं, असली पहचान के हकदार वही हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम नहीं चाहते कि सारा श्रेय सिर्फ सीजेपी को मिले। हम चाहते हैं कि छात्र स्वयं अपने अधिकारों और देश की शिक्षा प्रणाली के सुधार के लिए आगे आएं और लड़ाई लड़ें।