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India China Border Talks: LAC पर तनाव नहीं, संवाद होगा हथियार: भारत-चीन ने सीमा पर गलतफहमी रोकने के लिए बनाई नई रणनीति

India China LAC News: हिमालय की दुर्गम चोटियों पर दशकों से जारी सरहदी खींचतान के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत और चीन ने सीमा पर अचानक उपजने वाले भ्रम और संभावित टकराव को टालने के लिए एक बेहद अहम फैसला लिया है।
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India China diplomatic talks

India China diplomatic talks :भारत-चीन बैठक: LAC पर विवाद सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

MEA India China Statement: भारत और चीन की सीमाओं पर बीते कुछ सालों में जिस तरह की तनातनी देखने को मिली है, उसने न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव को भी बढ़ावा दिया। हालांकि, अब इस जमीनी तनाव को कम करने और किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने की दिशा में एक नया कूटनीतिक प्रयास शुरू हुआ है।

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी भी तरह के 'मिसकैलकुलेशन' (गलतफहमी या गलत आकलन) से बचने के लिए पूरी तरह सहमत हो गए हैं। इसके लिए दोनों देश अपने मौजूदा कूटनीतिक (Diplomatic) और सैन्य (Military) तंत्र का ही इस्तेमाल करेंगे।

सीमा विवाद पर कूटनीतिक और सैन्य वार्ता जारी रहेगी

नई दिल्ली में आयोजित भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक में दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमा पर किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव से बचने के लिए पहले से मौजूद राजनयिक और सैन्य संवाद तंत्र का लगातार इस्तेमाल किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दोनों देश सीमा पर स्थिरता को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद मान रहे हैं।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्रालय के सीमा एवं समुद्री मामलों की महानिदेशक हाउ यानची ने प्रतिनिधित्व किया। दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा की मौजूदा स्थिति की विस्तार से समीक्षा की और इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के साझा हित में है।

भारत ने बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। भारतीय पक्ष ने सीमापार नदियों से जुड़े विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (Expert Level Mechanism) की अगली बैठक जल्द बुलाने की आवश्यकता दोहराई। साथ ही चीन से ऊपरी हिस्से में बनने वाली परियोजनाओं की तकनीकी जानकारी समय पर साझा करने पर जोर दिया। ब्रह्मपुत्र जैसी अंतरराष्ट्रीय नदियों पर बनने वाली परियोजनाओं को लेकर भारत लंबे समय से पारदर्शिता की मांग करता रहा है।

India China Border Talks: क्यों जरूरी है यह नया समझौता?

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गश्त के दौरान अक्सर मौसम, खराब दृश्यता या सटीक सीमांकन न होने की वजह से दोनों सेनाओं के सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं। ऐसे में संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी बड़े सैन्य टकराव का रूप ले सकते हैं।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संवाद के स्थापित रास्तों का इस्तेमाल होने से:

  • सैन्य कमांडर स्तर की बैठकों के जरिए स्थानीय मुद्दों का तुरंत समाधान होगा।
  • विदेश मंत्रालयों के स्तर पर जारी वार्ता से रणनीतिक तालमेल बना रहेगा।
  • सरहद पर तैनात जवानों के बीच किसी भी गलतफहमी के कारण गोलीबारी या हिंसक झड़प की गुंजाइश खत्म होगी।

फिलहाल इस बैठक से यह स्पष्ट संदेश निकला है कि मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन संवाद के रास्ते खुले रहेंगे। आने वाले महीनों में होने वाली अगली बैठकों और सीमा पर वास्तविक स्थिति से यह तय होगा कि यह सकारात्मक माहौल स्थायी विश्वास में बदल पाता है या नहीं।