
Tamil Nadu Delimitation Debate: तमिलनाडु के खेल मंत्री आधव अर्जुन ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ विधानसभा में पारित प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आबादी के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से दक्षिणी राज्यों खासकर तमिलनाडु का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश की राजनीति में उत्तर भारत का वर्चस्व और बढ़ेगा।
आधव अर्जुन ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में दक्षिण भारत और तमिलनाडु से भी प्रधानमंत्री बनने की संभावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव कांग्रेस बनाम भाजपा का मुद्दा नहीं है। यह राज्यों की स्वायत्तता बनाए रखने का सवाल है। हम नहीं चाहते कि भविष्य में तमिलनाडु उत्तर भारतीय वर्चस्व के अधीन हो जाए।
मंत्री ने दावा किया कि संसद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण केंद्र सरकार कई बार ऐसे फैसले लागू कर देती है, जिनका तमिलनाडु विरोध करता रहा है।
उन्होंने कहा कि आज 234 सदस्यों वाली विधानसभा में भी कभी-कभी एक आवाज नहीं सुनी जाती। ऐसी स्थिति तमिलनाडु के साथ संसद में नहीं होनी चाहिए। अगर हमारे पास 100 सांसद होते, तो क्या NEET, GST या CAA इसी तरह लागू किए जाते? समस्या पर्याप्त प्रतिनिधित्व की है।
आधव अर्जुन ने तमिलनाडु के सभी 39 सांसदों से परिसीमन के मुद्दे पर एकजुट होकर संसद में अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में परिसीमन कानून आए, सभी सांसदों को मौजूदा स्थिति को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग करनी चाहिए और इसके विरोध में मतदान करना चाहिए, न कि सदन से बाहर निकलना चाहिए।
मंत्री ने परिसीमन के संभावित वित्तीय और राजनीतिक प्रभावों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु केंद्र को दिए गए प्रत्येक एक रुपये के बदले केवल 29 पैसे वापस प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाई जाती है, तब भी उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों की तुलना में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है।
आधव अर्जुन ने कहा कि परिसीमन का आधार चाहे जो भी हो, कुल लोकसभा सीटों की संख्या 543 ही रहनी चाहिए। दक्षिण भारत को भविष्य में फिर ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए, जहां उसका राजनीतिक प्रभाव लगातार कम होता जाए।
आधव अर्जुन के बयान पर बीजेपी विधायक भोजराजन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में लाए गए प्रस्ताव को अनावश्यक बताते हुए कहा कि बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ी है तो निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। गांव नगर पंचायतों में और कस्बे शहरों में बदल रहे हैं। ऐसे में परिसीमन की जरूरत है।