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‘आधार कार्ड फुलप्रूफ नहीं, वोटर लिस्ट में सुधार जरूरी है’, चुनाव आयोग और CEC के बचाव में उतरी TDP, कांग्रेस को दिया जवाब

SIR विवाद के बीच TDP नेता पल्ला श्रीनिवास राव ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा है?
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Sep 28, 2026
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तेलुगु देशम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव (फाइल फोटो - एएनआई)

Palla Srinivasa Rao on SIR Controversy: आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है। उन्होंने कांग्रेस की तरफ से चुनाव आयोग और CEC पर लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया है। पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि कांग्रेस के आरोपों में कोई दम नहीं है और इनके पीछे राजनीतिक एजेंडा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और स्वायत्त संवैधानिक संस्था है जिसका सभी को सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की पुरानी परंपरा रही है। करीब 97 करोड़ मतदाताओं वाले देश में चुनाव कराना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग सालों से इस जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से निभा रहा है।

SIR पर क्या बोले TDP नेता?

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को अपनी आपत्तियां और चिंताएं रखने के लिए बुलाया था। उन्होंने बताया कि TDP की ओर से उन्होंने खुद बैठक में हिस्सा लिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा अन्य चुनाव आयुक्तों के साथ चर्चा की।

राव के मुताबिक, बिहार चुनाव से पहले हुई इस चर्चा में एसआईआर को लेकर पार्टी की सभी आशंकाओं को दूर किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से उठाए गए सवालों का जवाब दिया गया और उन्हें संतोषजनक तरीके से स्पष्ट किया गया। उन्होंने मौजूदा चुनाव आयोग के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को चुनाव प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी और अनुभव है। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया।

आधार कार्ड फुलप्रूफ नहीं

पल्ला श्रीनिवास राव ने आधार कार्ड को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ज्यादातर राजनीतिक दलों का मानना था कि आधार प्रमाणित डेटा है इसलिए इसे मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

हालांकि, चुनाव आयोग के साथ विस्तृत चर्चा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि आधार डेटा पूरी तरह फुलप्रूफ नहीं है। राव के मुताबिक, आधार में नाम के अलावा अन्य जानकारियां बदली जा सकती हैं। इसलिए इसे मतदाता पंजीकरण के लिए एकमात्र प्रमाणित दस्तावेज नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने खास तौर पर बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से लगती सीमाओं वाले राज्यों में इसे एक बड़ी चुनौती बताया है।

SIR में 5-6 मानक तय

राव ने कहा कि दक्षिण और मध्य भारत में स्थिति कुछ अलग है, क्योंकि वहां आधार का सेवा रिकॉर्ड, परिवार और पंचायत से जुड़े डेटा के साथ मजबूत लिंक है। उन्होंने बताया कि एसआईआर के तहत चुनाव आयोग ने 5 से 6 मानक तय किए हैं। मतदाता को नाम दर्ज कराने के लिए अपने, निवास या परिवार से जुड़े कम से कम एक मानक को पूरा करना होगा।

TDP नेता ने कहा कि एसआईआर प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है और इस तरह के सुधार देश की प्रगति के लिए जरूरी है।

Updated on:
28 Sept 2026 08:40 am
Published on:
28 Sept 2026 08:40 am