Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। क्या यह किसी के दबाव या कहने पर देना पड़ा है… नीचे पढ़े पूरी अपडेट।
Nitish Kumar MLC Resignation: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया।
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि मैंने सुबह मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की, उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है। उनके जाने से बिहार दुखी है।
बता दें नीतीश कुमार का इस्तीफा पत्र लेकर जेडीयू के एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे, उन्होंने सभापति अवधेश नारायण सिंह को इस्तीफा सौंप दिया।
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने यह फैसला बीजेपी के दबाव में लिया है। यह उनका फैसला नहीं है, बीजेपी का है। उन्हें इसके लिए मजबूर किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला उन्होंने अकेले नहीं लिया।
तेजस्वी यादव ने कहा, “JDU के अंदर कुछ BJP एजेंटों ने इसे थोपा, इसीलिए ऐसा हुआ। हमने पहले ही कहा था कि वे उन्हें मुख्यमंत्री नहीं रहने देंगे और अब वही हो रहा है।”
उन्होंने आगे सरकार पर जरूरी वादों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- “बिजली के बिल बढ़ाकर नागरिकों को धोखा दिया है। बिहार में बिजली पहले से ही महंगी थी और अब यह और भी महंगी हो जाएगी। उन्होंने हर महिला को 2 लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 10,000 रुपये दिए। उन्होंने दावा किया कि बाकी पैसे चुनाव के बाद दिए जाएंगे, लेकिन अब वह वादा भी तोड़ा जा रहा है।”
इस बीच, कांग्रेस MP, प्रमोद तिवारी ने भी BJP की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने नीतीश कुमार समेत कई नेताओं को धोखा दिया है।
बता दें नीतीश कुमार, जो 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे और उसी दिन उन्हें अपना इलेक्शन सर्टिफिकेट मिला था, 10 अप्रैल को औपचारिक रूप से शपथ लेने वाले हैं।
संवैधानिक नियमों के अनुसार, संसद के लिए चुने गए व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपने मौजूदा लेजिस्लेटिव पद से इस्तीफा देना होता है, ऐसा न करने पर उनकी नई सदस्यता रद्द हो जाती है। इस आदेश का पालन करते हुए, उन्होंने 30 मार्च को अपना इस्तीफा दे दिया। अब इस इस्तीफे के साथ ही बिहार लेजिस्लेटिव काउंसिल के साथ नीतीश कुमार का लंबा जुड़ाव भी खत्म हो गया है।
वह पहली बार 2006 में सदस्य बने और लगातार चार टर्म तक सेवा की- 2006-2012, 2012-2018, 2018-2024, और 2024 के बाद पद छोड़ने से पहले।