तेलंगाना के जगतियाल जिले में भिमन्ना जातरा के दौरान बकरियों को दांतों से काटकर मारने की घटना सामने आई है। पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ पशु क्रूरता सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
तेलंगाना में पारंपरिक धार्मिक आयोजनों के दौरान पशु बलि की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन समय के साथ इस पर कानूनी और सामाजिक सवाल भी खड़े होते रहे हैं। पशु अधिकारों और मानवीय व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में आज भी बेहद क्रूर तरीके अपनाए जा रहे हैं। मंगलवार को ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला जगतियाल जिले के रैकाल कस्बे में आयोजित भिमन्ना जातरा के दौरान सामने आया, जिसने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया।
रैकाल कस्बे के एक मंदिर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दर्जनों बकरियों को अत्यंत पीड़ादायक तरीके से मारा गया। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिखाई दिया कि बकरियों की गर्दन को दांतों से काटा गया और उन्हें खून बहते हुए मरने के लिए छोड़ दिया गया। जानवरों को लंबे समय तक तड़पना पड़ा, जिससे उनकी पीड़ा और भी बढ़ गई। एक तस्वीर में एक व्यक्ति के चेहरे और शरीर पर खून लगा हुआ नजर आया, जिसने लोगों को झकझोर दिया। इन दृश्यों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
घटना के बाद पशु कल्याण संगठन से जुड़े अदुलापुरम गौतम की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), तेलंगाना राज्य अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम के आयोजक पी सुधाकर और डी गंगाधर ने इस अवैध और अमानवीय बलि पद्धति की अनुमति दी थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी तरह की क्रूरता को स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और सभी उपलब्ध सबूतों की समीक्षा की जा रही है। सब इंस्पेक्टर चितनेनी सुधीर राव ने बताया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस रस्म के दौरान मौजूदा पशु संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हुआ है। अधिकारियों ने सभी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजकों से अपील की है कि वे परंपराओं का पालन करते समय कानूनी और मानवीय तरीकों को अपनाएं। समाज के कई वर्गों ने इस घटना को संवेदनहीनता का उदाहरण बताते हुए कड़ी निंदा की है।