
TMC Political crisis : पश्चिम बंगाल की सियासत में इस समय बहुत अधिक हलचल देखी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर अंदरूनी बगावत की अटकलों के बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने साफ कहा कि भले ही सत्ताधारी दल के पास ईडी, सीबीआई और तमाम केंद्रीय शक्तियों का बल हो, लेकिन टीएमसी के पास 'मां, माटी, मानुष' की ताकत और पश्चिम बंगाल की जनता का पूरा भरोसा है। इस सियासी ड्रामे के बीच उन्होंने पार्टी आलाकमान के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दोहराई।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीएमसी नेता कीर्ति आजाद भी मौजूद थे। उन्होंने पार्टी से असंतुष्ट चल रहे नेताओं को आड़े हाथों लिया और उन पर राजनीतिक नैतिकता खोने का आरोप लगाया। आजाद ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जो लोग चुनाव जीतने के बाद अब ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, वे असल में 'गद्दार' हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर इन नेताओं में थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो वे तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर दुबारा चुनाव लड़ कर दिखाएं। उन्होंने पूर्व सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय का उदाहरण देते हुए कहा कि कम से कम उनमें इस्तीफा देने की हिम्मत तो थी।
कीर्ति आजाद ने उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि टीएमसी के 20 सांसद एक अलग गुट बनाकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने इसे भाजपा की एक सोची-समझी चाल और 'फर्जी' लिस्ट करार दिया। आजाद का कहना है कि पार्टी में फूट डालने की यह कोशिश पूरी तरह नाकाम रही है, क्योंकि लिस्ट में शामिल कई सांसदों ने किसी भी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा उधार के सिन्दूर से अपनी मांग भरने की कोशिश कर रही है।
दूसरी तरफ, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने टीएमसी के इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ममता बनर्जी के पैर तले जमीन खिसक चुकी है। पूनावाला के मुताबिक, लगभग 60 टीएमसी विधायक खुद को 'असली टीएमसी' बता रहे हैं और वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के कामकाज के तरीके से बहुत खफा हैं। वहीं, टीएमसी से निष्कासित नेता संदीपान साहा ने भी एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके पास 58 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ दो-तिहाई बहुमत है और वे विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरने जा रहे हैं। (इनपुट :ANI)