
TMC on Delimitation Bill: रविवार को मोदी सरकार ने मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में टीएमसी के बागी सांसदों के शामिल होने पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई और बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि बाद में बैठक में शामिल हो गए। इसी बीच टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है। जिसमें परिसीमन बिल और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
टीएमसी सांसद ने पत्र में लिखकर आरोप लगाया कि मोदी सरकार इन दोनों अहम विधेयकों को लेकर कठोर और अलोकतांत्रिक रवैया अपना रही है। साथ ही संसदीय परंपराओं की भी अनदेखी कर रही है।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि आगामी मानसून सत्र के लिए जारी संसदीय बुलेटिन में परिसीमन से जुड़े किसी विधेयक का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद उन्हें आशंका है कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा और राजनीतिक सहमति के इसे संसद में पेश कर सकती है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि परिसीमन का मुद्दा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक ढांचे से जुड़ा है, इसलिए सरकार को इसे "गुपचुप तरीके" से लाने से बचना चाहिए।
इस दौरान टीएमसी सांसद ने 2019 में पारित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सरकार पहले भी महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करा चुकी है। अपने पत्र में डेरेक ने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश किए गए थे। इनमें संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और वह पारित नहीं हो पाया।
ओ'ब्रायन ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित कानून शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों, विशेष रूप से ईसाई समुदाय द्वारा संचालित हजारों शैक्षणिक संस्थानों और कई धर्मार्थ संगठनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना व्यापक चर्चा के कानून बनाने से बचें और सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत कर आम सहमति बनाई जाए।