
क्या डीएमके परिसीमन बिल का करेगी समर्थन (Photo-IANS)
Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। वहीं इस बैठक में मोदी सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर डीएमके के रूख पर अलग-अलग दावे भी सामने आए है। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि DMK ने विधेयक का समर्थन कर दिया है, वहीं DMK सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट प्रस्ताव पेश ही नहीं किया है।
मीडिया से बात करते हुए RSP सांसद ने कहा कि दुर्भाग्य से DMK ने परिसीमन विधेयक का समर्थन कर दिया है। वहीं इस पर डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि सरकार ने परिसीमन पर कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं रखा है।
उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के हितों को किसी भी तरह नुकसान नहीं होना चाहिए। महिला आरक्षण विधेयक को मौजूदा सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जा सकता है। परिसीमन के मुद्दे पर हमें सरकार का स्पष्ट रुख जानना होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके चाहती है कि विधेयक में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान शामिल किया जाए कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान बढ़ोतरी होगी। हालांकि इसको लेकर लोकसभा में अमित शाह आश्वासन दे चुके हैं।
बताया जा रहा है कि यदि इस प्रावधान को विधेयक में लिखित रूप से शामिल किया जाता है, तो DMK इस पर सकारात्मक रुख अपना सकती है।
पिछले कुछ महीनों में परिसीमन विधेयक को लेकर DMK का रुख पहले की तुलना में काफी नरम हुआ है। इससे संसद में NDA के लिए राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार और कांग्रेस से रिश्तों में आई दूरी के बाद DMK ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ नहीं, बल्कि तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर फैसला करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सभी राज्यों में समान रूप से 50% सीट बढ़ाने का प्रस्ताव दक्षिणी राज्यों की उस चिंता को कम कर सकता है, जिसमें उन्हें अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी घटने का डर है।
लोकसभा में DMK के 22 सांसद हैं। परिसीमन विधेयक एक संवैधानिक संशोधन होने के कारण इसे पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (360 वोट) की आवश्यकता होगी।
वर्तमान में कुछ अन्य दलों के समर्थन के बाद NDA की प्रभावी संख्या 319 सांसदों तक पहुंच चुकी है और उसे अभी भी 41 वोटों की जरूरत है। यदि DMK विधेयक का समर्थन करती है या मतदान से दूरी बनाती है, तो NDA के लिए इस विधेयक को पारित कराना काफी आसान हो सकता है।
बता दें कि इस बार मानसून सत्र में मोदी सरकार सदन में परिसीमन बिल को पेश नहीं करेगी। हालांकि इससे पहले अटकलें लगाई जा रही थी कि इस सत्र में सरकार बिल को पेश कर सकती है। दरअसल, सदन में अभी एनडीए के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। सरकार चाहती है कि सदन में जब दो-तिहाई बहुमत होगा, तब ही इसको पेश किया जाएगा। क्योंकि जब पहले यह बिल सदन में आया था तो पास नहीं हो पाया।
Updated on:
19 Jul 2026 03:30 pm
Published on:
19 Jul 2026 03:30 pm
