
तृणमूल कांग्रेस - टीएमसी (Trinamool Congress - TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। टीएमसी में अंदरूनी कलह बढ़ती ही जा रही है। कई विधायकों और सांसदों के बगावत करने के बाद अब पार्टी चीफ और पूर्व सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। मार्च में एक धरना-प्रदर्शन के दौरान ममता ने भाषण देते हुए कहा था कि अगर बंगाल में टीएमसी की सरकार रहेगी, तो अल्पसंख्यक (मुस्लिम) सुरक्षित रहेंगे और बीजेपी आई, तो उनका बुरा हाल होगा। ममता के खिलाफ एक ईद कार्यक्रम में सनातन धर्म को गंदा धर्म कहने के मामले में भी एफआईआर दर्ज हुई है। इस मामले पर पार्टी के लोकसभा सांसद कीर्ति आज़ाद (Kirti Azad) ने सवाल उठाया है।
आज़ाद ने इस मामले पर बात करते हुए कहा, "टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ मामला दर्ज होना कोई चौंकाने वाली या बड़ी खबर नहीं है। हम सभी को ऐसे मामलों का सामना करना पड़ सकता है, चाहे वो झूठे हों या सच्चे। लेकिन सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पश्चिम बंगाल आए थे, तो उन्होंने भी कई ऐसे भाषण दिए थे जिन पर काफी आपत्ति और विरोध हो सकता था। अमित शाह ने कई बार 'उल्टा करके सीधा कर देना' और 'बंगाल पुलिस संभल जाओ' जैसी बातें कहीं। इन भाषणों पर भी कानूनी मामले दर्ज होने चाहिए क्योंकि इनसे जनता को डराया-धमकाया गया था। अगर ममता बनर्जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना सही है, तो उनके खिलाफ भी मुकदमें क्यों नहीं दर्ज होने चाहिए?"
टीएमसी के बागी नेताओं पर भी आज़ाद निशाना साध चुके हैं। उन्होंने बागियों को ‘गद्दार’ और ‘चूहे’ बताया, जो मुश्किल समय में पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं। आजाद ने इस मामले में कहा था, “हम संकट के समय चूहे की तरह नहीं भागते। हम दीदी के साथ खड़े हैं।” आज़ाद ने बीजेपी पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाकर टीएमसी तोड़ने का आरोप भी लगाया और बागियों को चुनौती दी कि नैतिकता है तो इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें।