
TMC Rebel MPs Join NCPI: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे भूचाल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग हुए इन सांसदों ने त्रिपुरा आधारित क्षेत्रीय दल नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया है। इसके साथ ही एक छोटे क्षेत्रीय दल की चर्चा अचानक राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी है।
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता गया। बागी सांसदों का आरोप रहा कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में कुल 20 सांसदों ने अलग रास्ता चुना और अब NCPI के मंच से अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने का फैसला किया है।
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का गठन जनवरी 2023 में हुआ था। यह त्रिपुरा आधारित एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है। पार्टी का प्रभाव मुख्य रूप से त्रिपुरा और असम के कुछ बंगाली बहुल इलाकों तक सीमित रहा है।
साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी इस पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि, राष्ट्रीय राजनीति में इसकी पहचान काफी सीमित थी और इसका दायरा पूर्वोत्तर भारत तक ही माना जाता था।
NCPI अब तक एक छोटी क्षेत्रीय पार्टी रही है, इसलिए इसके शुरुआती संगठनात्मक नेतृत्व में स्थानीय नेताओं की भूमिका प्रमुख रही। पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी भी मुख्य रूप से त्रिपुरा और पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े रहे हैं।
हालांकि, जून 2026 में TMC के 20 सांसदों के एक साथ पार्टी में शामिल होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
बागी सांसदों के इस समूह में काकोली घोष दस्तीदार, यूसुफ पठान, सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। संसद के भीतर इस नए समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं।
दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के लिए भी काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सांसदों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "आगे चलने के लिए, देश को आगे बढ़ाने के लिए आगे जा रहे हैं।"
बागी सांसदों के इस फैसले को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इन सांसदों ने सीधे किसी बड़े राष्ट्रीय दल में शामिल होने के बजाय NCPI का रास्ता चुना है।
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकातों के बाद इस समूह ने संसद में अलग पहचान की मांग की है। साथ ही केंद्र की NDA सरकार को समर्थन देने का भी एलान किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि TMC से अलग होने के बाद बागी सांसदों ने एक संगठित राजनीतिक मंच के रूप में आगे बढ़ने के लिए NCPI को चुना है। इसी वजह से अब यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है।
अब तक पूर्वोत्तर तक सीमित मानी जाने वाली NCPI के पास अचानक 20 लोकसभा सांसदों का समर्थन आ गया है। इससे पार्टी का राजनीतिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।
TMC में बगावत और उसके बाद NCPI में शामिल होने के फैसले ने न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा, नेतृत्व और संसद में उसकी भूमिका पर सभी की नजर बनी रहेगी।