Violence: पश्चिम बंगाल चुनाव में एक बार फिर हिंसा देखने को मिली है। मतदान केंद्र के बाहर दो गुटों के बीच जमकर हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों को स्थिति पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।
TMC-BJP Clashes: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर राजनीतिक रंजिश और हिंसा का खौफनाक मंजर देखने को मिला है। स्पष्ट तौर पर बता दें कि ये हिंसक घटनाएं चुनाव के दौरान नहीं, बल्कि चुनाव संपन्न होने के बाद (पोस्ट-पोल वायलेंस) घटित हुई हैं। चुनाव बीत जाने के बावजूद राज्य के कई हिस्सों में राजनीतिक तनाव चरम पर है। हालिया और सबसे गंभीर मामले बारानगर और जमुड़िया से सामने आए हैं, जहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया और न्यूज रिपोर्ट्स के हवाले से आ रही इन खबरों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली बड़ी घटना बारानगर इलाके की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया है। बताया जा रहा है कि चुनाव संपन्न होने के बाद से ही इस क्षेत्र में दोनों प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और तनाव का माहौल पनप रहा था। यह तनाव तब और बढ़ गया जब एक गुट ने दूसरे पर हावी होने का प्रयास किया। स्थानीय चश्मदीदों का कहना है कि भारी संख्या में एकत्र हुए लोगों ने टीएमसी कार्यालय को घेर लिया और वहां अपना झंडा लहराकर वर्चस्व स्थापित कर लिया। घटना के तुरंत बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह के बड़े टकराव को रोका जा सके।
दूसरी खौफनाक घटना जमुड़िया में हुई, जहां तनाव ने हिंसक आगजनी का रूप ले लिया। चुनाव के बाद के इस तनावपूर्ण माहौल में अज्ञात असामाजिक तत्वों (जिन पर विपक्षी गुट का होने का आरोप है) ने टीएमसी के एक पार्टी कार्यालय में पहले जमकर तोड़फोड़ की और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। आग इतनी भीषण थी कि कार्यालय के अंदर रखा सारा फर्नीचर, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य सामान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। गनीमत यह रही कि आगजनी के वक्त कार्यालय के भीतर कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
चुनाव के बाद भड़की इस हिंसा को देखते हुए राज्य प्रशासन हाई अलर्ट पर है। बारानगर और जमुड़िया, दोनों ही संवेदनशील इलाकों में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और राज्य पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं। इलाके में धारा 144 जैसी पाबंदियां लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज और स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रहे हैं। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पश्चिम बंगाल का यह चुनावी इतिहास रहा है कि यहां चुनाव प्रक्रिया से ज्यादा 'चुनाव के बाद की हिंसा' (Post-poll violence) एक बड़ी समस्या रही है। आम नागरिक इस राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के बीच खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द शांति बहाली की गुहार लगा रहे हैं।
लोकतंत्र में चुनावी रंजिश या हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। चुनाव आयोग (EC) की स्पेशल मॉनिटरिंग टीम हर एक गतिविधि पर आधुनिक तकनीक जैसे कि ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पैनी नजर रख रही है। आयोग की तरफ से सख्त हिदायत दी गई है कि जो भी व्यक्ति या समूह चुनाव में गड़बड़ी फैलाने या मतदाताओं को डराने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस हंगामे के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर चुनाव में खलल डाल रहे हैं और आम मतदाताओं को वोट डालने से रोक रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि सत्ता पक्ष अपनी संभावित हार के डर से बौखला गया है और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है। दोनों ही पक्षों ने चुनाव आयोग के सामने एक-दूसरे की लिखित शिकायत दर्ज कराई है और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
घटना के फौरन बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कड़ा एक्शन लेते हुए कुछ संदिग्ध उपद्रवियों को हिरासत में ले लिया है। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है और केंद्रीय बलों द्वारा लगातार फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन बूथों पर हिंसा के कारण मतदान ज्यादा प्रभावित हुआ है, वहां स्थिति की समीक्षा करने के बाद री-पोलिंग (पुनर्मतदान) पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, इलाके में शांति पूरी तरह से बहाल कर दी गई है और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटिंग सुचारू रूप से जारी है।
बंगाल के चुनावों में चुनावी रंजिश और खूनी झड़प का इतिहास काफी पुराना रहा है। दशकों से लगभग हर बड़े चुनाव के दौरान इस तरह की छिटपुट या बड़ी हिंसक घटनाएं देखने को मिलती रही हैं। इसका सीधा और नकारात्मक असर मतदाताओं के मतदान प्रतिशत (वोटिंग टर्नआउट) पर पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की हिंसा से न केवल आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की छवि भी धूमिल होती है। जब तक राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासित नहीं करेंगे, तब तक ऐसी घटनाओं को पूरी तरह से रोकना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।