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UBS Global Wealth Report: देश में रोज बन रहे 85 नए करोड़पति, ‘सोने-जमीन’ का मोह बरकरार

UBS Global Wealth Report 2026: वेल्थ क्रिएशन की रफ्तार के मामले में भारत ने ड्रैगन को पीछे छोड़ा, सालाना 3.4% की दर से बढ़े
2 min read
Jul 13, 2026
UBS Wealth Report
UBS ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2026 (फोटो- प्रतीकात्मक तस्वीर - AI)

UBS Global Wealth Report: स्विट्जरलैंड के दिग्गज बैंक यूबीएस (यूबीएस) की ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत ने साल 2025 में 31,033 नए यूएस डॉलर करोड़पति बनाए हैं, यह संख्या चीन के 14,079 नए करोड़पति के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक है। जहां भारत में करोड़पतियों की संख्या सालाना 3.4% की दर से बढ़ी है, वहीं चीन में यह रफ्तार महज 0.3% रही।

कुल बेस के मामले में चीन 53 लाख करोड़पति के साथ अभी भी भारत के लगभग 9.44 लाख करोड़पति से काफी आगे है, लेकिन वेल्थ क्रिएशन की रफ्तार के मामले में भारत ने ड्रैगन को पीछे छोड़ दिया है। डेटा के मुताबिक 2020 के बाद से भारत में 'औसत संपत्ति' में 20% का शानदार उछाल आया है।

देश 2025 में नए करोड़पति

अमरीका 4,41,078
यूके 43,139
फ्रांस 34,604
स्पेन 32,707
जापान 31,428
भारत 31,033
चीन 14,079

निवेश की अपनी—अपनी पसंद

74.2% संपत्ति जमीन या सोने में भारतीयों की
78.9% संपत्ति शेयर म्युचुअल फंड आदि अमरीका की
68.9% हिस्सा जापानी अमीरों का वित्तीय संपत्तियों में निवेशित
51.9% संपत्ति चीन के अमीरों की वित्तीय मार्केट में है।

'सोने और जमीन' से पुराना नाता

आरबीआइ से जुड़े एक घरेलू वित्तीय अध्ययन के अनुसार, एक औसत भारतीय परिवार अपनी संपत्ति का 77% हिस्सा रियल एस्टेट में, 11% सोने में, 7% टिकाऊ वस्तुओं में और महज 5% हिस्सा शेयर—म्युचुअल फंड आदि में रखता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन सोना है, जिसका इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ शादियों, आपातकालीन सुरक्षा और महंगाई से बचाव के लिए किया जाता है।

भारतीयों के लिए 'अमीर दिखना' जरूरी

भारत में पॉश इलाकों में जमीन और भारी सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं। कई लोगों के लिए 'अमीर दिखना', 'अमीर होने' जितना ही जरूरी है।

कम कर्ज, लेकिन भारी असमानता

भारतीय परिवारों पर कर्ज का बोझ उनकी कुल संपत्ति का केवल 8.2% है, जो चीन (10.6%) और अमरीका (10.9%) से कम है। भारतीय कर्ज के जाल में नहीं फंसे हैं, जो एक अच्छी बात है।

अमीर-गरीब की गहरी खाई बरकरार

रिपोर्ट में भारत का 'वेल्थ गिनी इंडेक्स' 0.74 बताया गया है। यहां 0 का मतलब पूर्ण समानता, 1 का मतलब चरम असमानता है। यह आंकड़ा चीन (0.60) से बहुत ज्यादा और अमरीका (0.77) के करीब है, जो देश में अमीर और गरीब के बीच की गहरी खाई को दर्शाता है।

अमीर होने के बाद भी पीड़ा

भारत सहित कई देलोग अपनी संपत्ति का आकलन दूसरों की तुलना में करते हैं। इसलिए लोग अमीर होने के बाद भी खुद को अमीर महसूस नहीं कर पाते। — पॉल डोनोवन, मुख्य अर्थशास्त्री, यूबीएस

Updated on:
13 Jul 2026 06:35 am
Published on:
13 Jul 2026 06:34 am
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