वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की कि सरकार ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों में विशेष रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में मदद करेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र के दौरान रविवार को एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की। जिसे भारत के महत्वपूर्ण खनिजों के साथ जुड़ाव को नया रूप देने के लिए डिजाइन किया गया है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने घोषणा की कि सरकार ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को विशेष रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में सहायता देगी।
इन कॉरिडोर को व्यापक हब के रूप में देखा जा रहा है। जो रेयर अर्थ विकास की पूरी वैल्यू चेन को कवर करेंगे। इसमें खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और उन्नत विनिर्माण शामिल हैं।
यह घोषणा नवंबर 2025 में शुरू की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना पर आधारित है। जो लंबे समय से आयात पर निर्भर इस क्षेत्र में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक सोचा-समझा कदम है।
कैबिनेट ने नवंबर में देश में 7,280 करोड़ रुपये के निवेश से सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को मंजूरी दी थी।
दरअसल, सरकार ने एक नया और अनोखा कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। जिसका लक्ष्य भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) बनाने की क्षमता तैयार करना है।
वर्तमान में, भारत चीन से आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर है। यह निर्भरता रणनीतिक चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण में रेयर अर्थ का बहुत महत्व है।
स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा देकर, सरकार राष्ट्रीय विकास और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना चाहती है। राज्यों का चुनाव मनमाना नहीं है।
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मोनाजाइट व अन्य समुद्र तट रेत खनिजों के प्रचुर भंडार हैं। ये संसाधन रेयर अर्थ तत्वों से भरपूर हैं, जो उन्हें एकीकृत विकास के लिए स्वाभाविक उम्मीदवार बनाते हैं।
ये नए रेयर अर्थ कॉरिडोर सिर्फ खनन तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका पूरा फोकस मुख्यतः दो चीजों पर होगा। एक तो यह कच्चे माल को शुद्ध करके अच्छी क्वालिटी का उपयोगी उत्पाद बनाना और दूसरा रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन करना।
उधर, उद्योग पर्यवेक्षकों ने इस कदम का स्वागत किया है, इसे रेयर अर्थ उत्पादन और निर्यात में चीन के लगभग एकाधिकार को लेकर वैश्विक चिंताओं के लिए एक रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा है।
यह पहल राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के उद्देश्यों के साथ अच्छी तरह से मेल खाती है और खनन क्षेत्र में हाल के सुधारों का पूरक है जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।