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X पर भिड़े असदुद्दीन ओवैसी और किरेन रिजिजू, जानें क्या है पूरा मामला

बुधवार को एक्स पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और AIMIM सांसद ओवैसी अल्पसंख्यक छात्र कल्याण योजनाओं को लेकर भिड़ गए।
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Oct 01, 2025
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X पर भिड़े ओवैसी और रिजिजू (Photo-IANS)

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बीच बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखी बहस हो गई। दरअसल, दोनों नेता अल्पसंख्यक छात्र कल्याण योजनाओं को लेकर भिड़ गए। AIMIM सांसद ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि एनडीए सरकार ने छात्रवृत्ति को कक्षा 9 और 10 तक सीमित कर दिया है, जबकि मुसलमानों में ड्रॉपआउट कक्षा 5 से ही शुरू हो जाता है। इस पर केंद्रीय मंत्री किरने रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा- प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति केवल कक्षा-9 और 10 तक ही सीमित है, क्योंकि कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को RTE के तहत मुफ्त और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा देना अनिवार्य है। 

मौलाना आजाद राष्ट्रीय फेलोशिप योजना को किया बंद

वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- मौलाना आजाद राष्ट्रीय फेलोशिप योजना को बंद कर दिया गया है क्योंकि यह अन्य मंत्रालयों और विभागों की समान योजनाओं के साथ ओवरलैप हो रही थी।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा- इसके अलावा, यूजीसी और सीएसआईआर फेलोशिप योजनाएं अल्पसंख्यकों सहित सभी सामाजिक श्रेणियों और समुदायों के छात्रों के लिए खुली हैं। पीएमजेवीके, पीएम विकास जैसी योजनाएं अधिकतम समावेशिता और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए लागू की जा रही हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने फिर किया पलटवार

रिजिजू के पोस्ट का जवाब देते हुए AIMIM सांसद ओवैसी ने कहा- शिक्षा का अधिकार अधिनियम का इस्तेमाल प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति को प्रतिबंधित करने के लिए एक छलावा के रूप में किया जा रहा है, जो ड्रॉपआउट दर को कम करने में मदद करता है। 

एक्स पर पोस्ट करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का उद्देश्य स्कूल छोड़ने की दर को कम करना था, जो कक्षा 9-10 से बहुत पहले शुरू हो जाती है। इससे अल्पसंख्यक परिवारों पर वित्तीय बोझ कम करने में मदद मिली। आरटीई का इस्तेमाल केवल दिखावा के तौर पर किया जा रहा है। मोदी सरकार ने अन्य समुदायों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय फेलोशिप योजना को बंद किये जाने के बारे में ओवैसी ने कहा- इसका उद्देश्य छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने में मदद करना था, क्योंकि अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व कम है। साथ ही 

उन्होंने यह भी दावा किया कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के बजट में 2023-24 में बड़ी कमी देखी गई और मुद्रास्फीति के बावजूद तब से यह लगभग समान ही बना हुआ है।

Updated on:
01 Oct 2025 10:01 pm
Published on:
01 Oct 2025 10:01 pm
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