
UPI Charges: यूपीआई से पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि यूपीआई के जरिए पैसे भेजने या लेने वाले लोगों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाता है तो यह सभी कारोबारियों पर नहीं लगेगा, बल्कि तय सीमा से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही मामूली दर से लागू किया जा सकता है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा। यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई के जरिए पैसे भेजने पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगेगा। सरकार ने यह भी कहा कि कारोबारियों पर भी कोई व्यापक या blanket MDR लागू नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में MDR लागू करने का फैसला होता है तो यह केवल कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा और इसके लिए एक निश्चित सीमा तय की जाएगी। सरकार के अनुसार, यह शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन पर लागू MDR की तुलना में काफी कम होगा।
सरकार की यह सफाई Payment and Settlement Systems Act, 2007 में हालिया संशोधन को लेकर उठे सवालों के बीच आई है। संशोधन को लेकर ऐसी आशंकाएं जताई जा रही थीं कि इसके बाद यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों पर भी चार्ज लगाया जा सकता है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधन एक प्रावधान है। इसका उद्देश्य यूपीआई इकोसिस्टम की लंबे समय तक स्थिरता, तकनीकी विकास और मजबूती सुनिश्चित करना है। ये प्रस्तावित बदलाव Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 का हिस्सा हैं।
सरकार के मुताबिक, बिल को संसद की मंजूरी मिलने के बाद अगर MDR लागू करने की जरूरत महसूस होती है तो इसकी दर तय करने का फैसला 'UPI and Services Steering Committee' करेगी। इस समिति की अध्यक्षता नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) करेगा। सरकार का कहना है कि यूपीआई पर लगातार बढ़ रहे ट्रांजैक्शन के चलते साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत है।