अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है। साथ ही कहा कि राष्ट्रपति द्वारा दुनिया के देशों पर लगाया गया टैरिफ गैरकानूनी है। वहीं अब फैसले के बाद मोदी सरकार में मंत्री प्रह्लाद जोशी का बयान सामने आया है।
मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मैंने मीडिया में पढ़ा है कि अमेरिका के टॉप कोर्ट ने कुछ फैसला दिया है और भारत सरकार उसकी स्टडी करेगी, और जो भी प्रतिक्रिया देनी होगी वह कॉमर्स मिनिस्ट्री और विदेश मंत्रालय देगा, मैं नहीं दूंगा।
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों पर कमेंट करना भारत की कभी परंपरा नहीं रही है, इसलिए हम इस पर कमेंट नहीं करेंगे। यह अमेरिका का अंदरूनी मामला है – उनकी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच का मामला।
वहीं इस पर जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि फेडरल कोर्ट ने टैरिफ के मामले में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ पहले ही फैसला सुनाया था। US सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील फाइल की थी। अब, US सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि डोनाल्ड ट्रंप का ये टैरिफ लगाने का अधिकार गलत था और उन्हें गैर-कानूनी घोषित कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि जिन देशों पर इन टैरिफ का असर पड़ा था और जिन्होंने ज़्यादा ड्यूटी दी थी, उनके एक्सपोर्टर्स के लिए यह बहुत अच्छी खबर है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने चुकाई गई ज़्यादा रकम वापस करने का ऑर्डर दिया है।
वहीं JD(U) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "US टैरिफ के बारे में, US सुप्रीम कोर्ट ने वहां रोक लगाई है। फॉर्मली, यह US का अंदरूनी मामला है।"
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि भारत-अमेरिका का अंतरिम व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “हताशा और आत्मसमर्पण” का परिणाम है और इससे देश को नुकसान हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अगर प्रधानमंत्री मोदी अपनी छवि बचाने के लिए जल्दबाजी न करते और सिर्फ 18 दिन और इंतजार कर लेते, तो भारतीय किसानों को नुकसान से बचाया जा सकता था और देश की संप्रभुता भी सुरक्षित रहती।