
Operation Sindoor strategist: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की रणनीति और परिचालन तैयारियों में अहम भूमिका निभाने वाले वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने शनिवार को भारतीय नौसेना के उप प्रमुख (Vice Chief of Naval Staff) का पदभार संभाल लिया।
भारतीय नौसेना ने बताया कि वाइस एडमिरल प्रमोद दिसंबर 2023 से जुलाई 2026 तक नौसेना संचालन महानिदेशक (डीजीएनओ) के पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की योजना, परिचालन तैयारियों और नौसेना की युद्धक तत्परता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में भी उनकी अहम भागीदारी रही।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 7 मई 2025 की सुबह ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। चार दिनों तक चले सैन्य अभियान के बाद मीडिया को जानकारी देने वाले शीर्ष सैन्य अधिकारियों में वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद भी शामिल थे।
ऑपरेशन के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यदि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना को सक्रिय रूप से कार्रवाई का अवसर मिलता, तो पाकिस्तान को और अधिक गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि पाकिस्तान भविष्य में फिर से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है, तो भारतीय नौसेना उसे करारा जवाब देने में सक्षम है।
वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद गोवा स्थित भारतीय नौसेना अकादमी के 38वें एकीकृत कैडेट पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र हैं। उन्हें जुलाई 1990 में भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वे संचार (Communication) और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के विशेषज्ञ हैं।
उन्होंने वेलिंगटन स्थित रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज तथा गोवा स्थित नौसेना युद्ध महाविद्यालय से नौसेना उच्च कमान पाठ्यक्रम भी पूरा किया है।
भारतीय नौसेना के अनुसार, 36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में वाइस एडमिरल प्रमोद ने समुद्र और तट, दोनों क्षेत्रों में कमान, परिचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
समुद्री सेवाओं के दौरान उन्होंने निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी, पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस शार्दुल तथा निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान संभाली।
इसके अलावा, पूर्वी लद्दाख में गलवान संघर्ष के बाद चलाए गए ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान उन्होंने पश्चिमी बेड़े के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने 1999 के ऑपरेशन विजय और 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी सक्रिय भागीदारी की थी।