West Bengal election 2026 Phases: पहले चरण के लिए प्रदेश की 152 सीटों पर चुनाव होगा। 2021 में इन सीटों पर कड़ा मुकाबला हुआ था।
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। वहीं वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी। प्रदेश में करीब साढ़े तीन दशक के बाद दो चरणों में मतदान हो रहा है। इससे पहले 1991 में दो चरणों में मतदान हुए थे। उसके बाद से पांच से छह और सात-आठ चरणों में चुनाव होते रहे हैं। 2021 में प्रदेश में 8 चरणों में मतदान हुआ था।
पहले चरण के लिए प्रदेश की 152 सीटों पर चुनाव होगा। 2021 में इन सीटों पर कड़ा मुकाबला हुआ था। 2021 में इन सीटों पर टीएमसी ने शानदार प्रदर्शन किया था। टीएमसी ने 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा बीजेपी के खाते में 59 सीटें गईं। वहीं एक सीट अन्य के खाते में गई।
पहले चरण में उत्तर, पश्चिम और मध्य बंगाल के कई इलाके आते हैं। यही वे इलाके हैं जहां पर 2021 में बीजेपी ने टीएमसी की सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उठाया था।
विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी के सामने पहले चरण में 2021 से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती होगी। दूसरी तरफ टीएमसी भी पहले चरण में ज्यादा सीटें जीतना चाहेगी।
29 अप्रैल को होने वाला दूसरा चरण बीजेपी के लिए कहीं ज्यादा मुश्किल माना जा रहा है। इस चरण में कुल 142 सीटों पर वोटिंग होगी। 2021 के नतीजों के आधार पर देखें तो इनमें से 123 सीटें (करीब 86.6%) टीएमसी के असर वाले इलाके हैं।
यह वही इलाका है जिसने 2021 में ममता बनर्जी को लगातार तीसरी बार सत्ता तक पहुंचाया था। यहां टीएमसी की मजबूत पकड़ और कल्याणकारी योजनाओं का असर लंबे समय से देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी यहां सिर्फ 18 सीटें (करीब 12.7%) जीती थीं, जबकि एक सीट दूसरी के खाते में गई थी।
प्रदेश में दो चरणों में मतदान होना बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है, क्योंकि पहले चरण में उन जगहों पर मतदान होगा जहां पर पार्टी थोड़ी मजबूत है, लेकिन दूसरे चरण वाले इलाकों में बीजेपी की पकड़ कमजोर है। ऐसे में बीजेपी को यहां बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाने होंगे।
वहीं टीएमसी के लिए दो चरणों का यह ढांचा फायदेमंद माना जा रहा है। उसका सबसे मजबूत इलाका दूसरे चरण में वोट करेगा, जिससे पहले चरण के बाद पार्टी को राजनीतिक गति (मोमेंटम) मिल सकती है।
2021 के चुनावी नतीजों से यह भी साफ होता है कि महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सरकारी योजनाओं के असर का झुकाव टीएमसी की ओर रहा है।