Mamata Banerjee vs Election Commission: बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले अंतिम वोटर लिस्ट जारी हो गई है। SIR को लेकर प्रदेश में जमकर बवाल मचा था।
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। विधानसभा चुनाव का परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इससे पहले प्रदेश में SIR को लेकर खूब राजनीति हुई। SIR को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सड़क से लेकर कोर्ट तक इसकी लड़ाई। अब चुनाव आयोग ने प्रदेश में मतदाता सूची की अंतिम लिस्ट जारी कर दी है।
जिसमें करीब 91 लाख लोगों को बाहर कर दिया है। इससे राज्य की मतदाता संख्या अक्टूबर 2025 के 7.66 करोड़ से घटकर 6.75 करोड़ रह गई है, जो करीब 12% की कमी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जांच में 60.06 लाख में से 27.16 लाख विवेचनाधीन मतदाताओं के नाम हटाए गए।
ये जिले सीमावर्ती और अल्पसंख्यक-बहुल हैं। इनमें ज्यादातर कटौती विचाराधीन मामलों की न्यायिक जांच के बाद हुई, जिसमें 27 लाख से ज्यादा नाम अपात्र पाए गए। कुल कटौती में मृत, शिफ्टेड, डुप्लिकेट और अपात्र वोटर शामिल हैं। विपक्ष इसे टीएमसी गढ़ों पर असर मान रहा है, जबकि आयोग इसे सूची शुद्धिकरण बता रहा है। इससे 2026 विधानसभा चुनाव का समीकरण बदल सकता है।
1- मुर्शिदाबाद- जिले में 22 विधानसभा सीटें है। इनमें से पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 20 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं बीजेपी को महज 2 सीटों पर ही जीत मिली।
2- उत्तर 24 परगना- जिले में 33 विधानसभा सीटें हैं। विधानसभा चुनाव 2021 में टीएमसी ने 28 और बीजेपी ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया था।
3- मालदा- जिले में 12 विधानसभा सीटें हैं। इसमें से टीएमसी ने 8 और बीजेपी ने चार सीटें जीती थी।
दरअसल, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और मालदा जिले की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में टीएमसी ने जीत दर्ज की थी। वहीं बीजेपी ने भी कड़ी टक्कर दी थी। कांग्रेस और लेफ्ट के हाथ एक भी सीट नहीं लगी।
इन जिलों में अधिक वोटरों की कटौती के कारण इसका सीधा असर 2026 चुनाव पर पड़ेगा। कई सीटों पर 2021 की जीत का मार्जिन कटे वोटरों से कम हो गया है । टीएमसी का माइनॉरिटी और महिला वोट बैंक कमजोर होगा।
यदि मुस्लिम वोटरों के वोट ज्यादा कटे हैं तो साफ तौर पर ममता बनर्जी को बड़ा झटका लग सकता है। क्योंकि राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 2021 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों की बदौलत ही ममता बनर्जी ने सरकार बनाई थी।