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जब संसद में आगबबूला हो गई थी ममता बनर्जी, रामविलास पासवान की ओर शॉल फेंक इस्तीफा देने की कही थी बात

Bengal Election 2026: ममता बनर्जी ने तुरंत अपना इस्तीफा घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सदन में हलचल मच गई। 

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Photo-IANS)

Mamata Banerjee controversy shawl incident: पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुकाबला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर से सत्ता में आने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। ममता बनर्जी का संसद का एक हिस्सा बहुत ज्यादा चर्चाओं में रहा, जब उन्होंने तत्कालीन रेल मंत्री रामविलास पासवान की ओर शॉल फेंक दी थी।

ममता ने रामविलास की ओर फेंकी शॉल

फरवरी 1997 में तत्कालीन रेल मंत्री रामविलास पासवान ने रेल बजट पेश किया था। इस दौरान ममता बनर्जी ने रेल मंत्री पर बंगाल की अनदेखी करने का आरोप लगाया और रामविलास पासवान की ओर अपनी शॉल फेंक दी। 

क्या है पूरा मामला

दरअसल, देवगौड़ा सरकार में रामविलास पासवान रेल मंत्री थे।  1997 के फरवरी माह में उन्होंने लोकसभा में रेल बजट 1997-98 पेश किया। ममता बनर्जी उस समय कलकत्ता दक्षिण सीट से कांग्रेस सांसद थी। बजट के दौरान रामविलास पासवान ने बंगाल के लिए नई ट्रेनों, रेलवे लाइनों या विकास परियोजनाओं की अपेक्षाकृत कम घोषणाएं थीं। 

इसके बाद ममता बनर्जी को लगा कि केंद्र सरकार जानबूझकर बंगाल को नजरअंदाज कर रही है। बजट भाषण समाप्त होने के बाद संसद में तनाव बढ़ गया। जैसे ही रामविलास पासवान ने अपना भाषण खत्म किया, ममता बनर्जी खड़ी हो गई।  गुस्से में उन्होंने अपनी शॉल उतारकर पासवान की ओर फेंक दी। शॉल पासवान के पास गिर गई। 

तुरंत कर दिया इस्तीफा

ममता बनर्जी ने तुरंत अपना इस्तीफा घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सदन में हलचल मच गई।

संसद में बढ़ते तनाव को लेकर स्पीकर ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने ममता बनर्जी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इस दौरान स्पीकर ने ममता बनर्जी को माफी मांगने की सलाह दी। हालांकि बाद में कांग्रेस नेता संतोष मोहन देब की मध्यस्थता से मामला सुलझा। 

मीडिया में हुई चर्चा

संसद में ममता बनर्जी के इस कदम की मीडिया में काफी चर्चा हुई और बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर फेम मिला। हालांकि इस घटना के बाद ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच मतभेद होने लगे। बाद में उन्होंने 1998 में अपनी अलग पार्टी तृणमूल कांग्रेस बनाई। 

वाम पंथ के किले को ढहाया

पश्चिम बंगाल चुनाव 2011 में ममता बनर्जी ने वामपंथियों के 34 साल पुराने किले को ढहा दिया। इसके बाद से प्रदेश में लगातार टीएमसी की सरकार बन रही हैं। इस बार ममता के सामने अपने किले को बचाने की चुनौती है, तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। लेफ्ट और कांग्रेस प्रदेश में लगभग खत्म हो गया है। पिछले चुनाव में दोनों पार्टियों का खाता भी नहीं खुल पाया था।