बंगाल चुनाव में EVM गड़बड़ी के आरोपों पर BJP उम्मीदवार असीम कुमार ने 28 शिकायतों का दावा किया। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी वाले बूथों पर रिपोल होना चाहिए, नहीं तो राष्ट्रपति शासन की नौबत आ सकती है।
West Bengal elections: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनाव के बीच बीजेपी (BJP) उम्मीदवार असीम कुमार सरकार ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलचल तेज कर दी है। उनका कहना है कि अगर 4 मई के बाद दोबारा मतदान हुआ, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लग सकता है।
नादिया से बीजेपी उम्मीदवार असीम कुमार सरकार ने दावा किया कि उनके क्षेत्र में कई जगह ईवीएम मशीनों में खराबी सामने आई। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र से 28 शिकायतें मिली हैं। सरकार के मुताबिक, उन्होंने पहले कभी एक ही इलाके में इतनी ज्यादा ईवीएम खराबी नहीं देखी। इसको लेकर उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत भी दर्ज कराई है और जरूरी कार्रवाई की मांग की है।
असीम सरकार ने साफ कहा कि जहां भी गड़बड़ी या हिंसा की घटनाएं हुई हैं, वहां दोबारा मतदान होना चाहिए।
उन्होंने एक बीजेपी पोलिंग एजेंट पर हमले का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सके।
उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा राष्ट्रपति शासन को लेकर था। उन्होंने कहा कि अगर 4 मई के बाद रिपोल होता है, तो उस समय राज्य में मौजूदा सरकार नहीं रहेगी और हालात ऐसे बन सकते हैं कि राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़े। हालांकि यह एक राजनीतिक बयान है, लेकिन इससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी साफ किया है कि अगर किसी बूथ पर ईवीएम के बटन से छेड़छाड़ या गड़बड़ी की शिकायत सही पाई जाती है, तो वहां दोबारा मतदान कराया जाएगा। यह बयान तब आया जब बीजेपी ने डायमंड हार्बर के फाल्टा इलाके में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग की तारीफ भी की। उनका कहना है कि इस बार बंगाल में पहले के मुकाबले ज्यादा शांतिपूर्ण मतदान देखने को मिला। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल पूरी तरह सक्रिय रहे, जिसकी वजह से हालात काबू में रहे। हालांकि कुछ जगहों पर छिटपुट घटनाएं जरूर सामने आईं।
दूसरे चरण के मतदान के दौरान सुबह 11 बजे तक करीब 39.97 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। पूर्व बर्धमान जिले में सबसे ज्यादा 44.50 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि हुगली में 43.12 प्रतिशत वोट पड़े। कोलकाता उत्तर में 38.39 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 36.78 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया।