
बंगाल चुनाव हिंसा (Video Screenshot)
नादिया जिले के चापड़ा में सुबह के 5 भी नहीं बजे थे कि भाजपा के पोलिंग एजेंट मोशरफ मीर लहूलुहान होकर जमीन पर पड़े थे। उनके सिर पर लोहे की रॉड से वार किया गया था। जब वे बूथ नंबर 53 पर ड्यूटी के लिए जा रहे थे तभी जान अली मोल्ला के घर से अचानक 15 से 20 लोग निकले। हाथों में बांस के डंडे, लोहे की रॉड और हथियार थे। मीर गिरे, लेकिन मारपीट रुकी नहीं। वहां मौजूद चार आईएसएफ एजेंटों को भी पीटा गया। हमला करके सब भाग गए।मीर ने कहा, "हम बस यही चाहते थे कि लोग शांति से वोट डाल सकें।" लेकिन बंगाल में चुनाव का यही चेहरा है, जो हर बार सामने आता है।
दक्षिण 24 परगना इस पूरे चुनाव में हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा। भांगर विधानसभा के सैहाटी इलाके में जब एआईएसएफ विधायक और उम्मीदवार मोहम्मद नौशाद सिद्दीकी एक बूथ पर पहुंचे तो तृणमूल समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल बिगड़ा और आखिरकार केंद्रीय बलों को दखल देकर दोनों पक्षों को अलग करना पड़ा। सिद्दीकी का कहना था कि सुबह सब ठीक था, लेकिन बाद में जानबूझकर माहौल खराब किया गया।
बसंती में तो और भी खतरनाक घटना हुई। यहां भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार जब बूथ नंबर 76 के पास निरीक्षण के लिए पहुंचे तो तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की और उनके सुरक्षाकर्मी की बंदूक तक छीनने की कोशिश हुई। आरोप यह भी है कि केंद्रीय बल मौजूद थे लेकिन उन्होंने रोका नहीं।
उत्तर 24 परगना के सासन इलाके में तृणमूल कार्यकर्ताओं पर मतदाताओं को डराने का आरोप लगा। जब ग्रामीणों को पता चला तो उन्होंने खुद सड़क पर उतरकर विरोध जताया। हुगली के खानाकुल विधानसभा क्षेत्र के रामचंद्रपुर गांव में एआईएसएफ और तृणमूल के बीच सीधी झड़प हुई। एआईएसएफ के लोगों ने आरोप लगाया कि उनके एजेंटों को मंगलवार रात से ही धमकाया जा रहा था और बूथ के अंदर जाने नहीं दिया गया। फर्जी एजेंट बिठाए गए। जब उम्मीदवार खुद पहुंचे तो स्थिति और भड़क गई।
हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र में ईवीएम खराब हो गई। मतदाता घंटों इंतजार करते रहे और गुस्सा बढ़ता गया। हालात इतने बिगड़े कि केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें कांग्रेस और तृणमूल के पोलिंग एजेंट घायल हो गए। दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
बंगाल में हर चुनाव के साथ यही सवाल उठता है कि क्या यहां वोट डालना वाकई आजाद है? मतदाता वोट देने निकलता है और रास्ते में डर होता है। पोलिंग एजेंट ड्यूटी पर जाता है और सिर फूटकर वापस आता है। यही बंगाल का चुनावी सच है जो इस बार भी दोहराया गया। नतीजे 4 मई को आएंगे। लेकिन जो घाव आज लगे हैं वो शायद बहुत देर तक नहीं भरेंगे।
Updated on:
29 Apr 2026 01:09 pm
Published on:
29 Apr 2026 01:08 pm
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