West Bengal Election: ममता बनर्जी द्वारा EVM पर उठाए गए सवाल को लेकर सियासी बहस तेज है। यह कदम रणनीति, सतर्कता या दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है, जिसका असली असर चुनाव नतीजों के बाद ही साफ होगा।
West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के बाद सियासी माहौल बेहद गर्म हो गया है। वोटिंग पूरी हो चुकी है और अब सबकी नजर काउंटिंग पर टिकी है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने अचानक ईवीएम (EVM) को लेकर सतर्कता का संदेश देकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से EVM स्ट्रॉन्गरूम की निगरानी करने की अपील की, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। सवाल उठ रहा है कि यह कदम सिर्फ सावधानी है या किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा।
ममता बनर्जी ने वीडियो संदेश में तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं से 24 घंटे EVM स्ट्रॉन्गरूम पर नजर रखने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा मशीनों से छेड़छाड़ या बदलाव की कोशिश हो सकती है। बाद में उन्होंने खुद कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम का दौरा भी किया और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों का दावा किया। हालांकि चुनाव आयोग (Election Commission) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि EVM पूरी तरह सुरक्षित हैं और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। इसके बावजूद टीएमसी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन कर प्रक्रिया में खामियों का आरोप लगाया।
दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी का EVM पर यह आक्रामक रुख पहले देखने को नहीं मिला था। जहां राहुल गांधी लगातार EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, वहीं टीएमसी ने पहले इस मुद्दे से दूरी बनाए रखी थी। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने तो पहले साफ कहा था कि वोट चोरी EVM से नहीं बल्कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से होती है। इससे साफ है कि पार्टी अब अपने पुराने स्टैंड से अलग दिशा में जाती दिख रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। पहला, एग्जिट पोल में BJP को बढ़त दिखाए जाने के बाद टीएमसी पहले से ही माहौल तैयार करना चाहती है, ताकि चुनाव नतीजे प्रतिकूल आने पर सवाल उठाए जा सकें। दूसरा, यह कदम कार्यकर्ताओं को सक्रिय और एकजुट रखने की रणनीति भी हो सकता है। ममता बनर्जी खुद स्ट्रॉन्गरूम पहुंचकर यह संदेश देना चाहती हैं कि वह जनादेश की रक्षा के लिए तैयार हैं। तीसरा, इससे चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बनता है कि वे पारदर्शिता और निगरानी को और मजबूत करें।