
West Bengal Minister Dilip Ghosh on UCC Bill: पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की विदाई के बाद राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल (UCC) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने रविवार को दावा किया किया UCC बिल विधानसभा में पास होगा, क्योंकि कई दूसरे राज्य पहले ही इस तरह के कानून को पास कर चुके हैं।
मीडिया से बातचीत करते हुए दिलीप घोष ने कहा, 'UCC बिल पास होना ही है। यह कई राज्यों में पास हो चुका है, और यहां भी प्रोसेस शुरू हो गया है। अगले कदम, बिल कब पेश किया जाएगा और क्या होगा, यह सरकार पर निर्भर है।' मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि गुजरात, उत्तराखंड और असम में अपनाए गए मॉडल के हिसाब से राज्य में UCC लागू किया जाएगा। इसका अध्ययन करने के लिए एक कमेटी गठित की गई है।
इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा था कि 29 जून को राज्य विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों की सूची में शामिल होगा, जहां यूसीसी कानून लागू किया जा चुका है।
इस संबंध में उन्होंने कहा, 'हमने अपने घोषणापत्र में यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट किया था। 29 जून को हम बंगाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करेंगे, उसे पारित कराएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि बंगाल भी यूसीसी लागू करने वाले राज्यों में शामिल हो जाए।' याद दिला दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बहुमत मिलने पर पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने का वादा किया था।
उत्तराखंड फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित करने वाला पहला राज्य बना। इसके बाद मार्च 2026 में गुजरात और मई 2026 में असम ने इससे संबंधित कानूनों को पारित किया है। मध्य प्रदेश में आगामी मानसूत्र सत्र में यूसीसी विधायक लाया जा सकता है, जिसके संकेत पहले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव दे चुके हैं। वहीं इसके अतिरिक्त केंद्र और कई राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने और अध्ययन के लिए समितियां गठित कर दी हैं।
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी ऐसा कानून है, जिसके तहत देश के सभी नागरिकों, चाहे उनका धर्म कोई भी हो, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और भरण-पोषण जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू होगा। मौजूदा वक्त में भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग कानून हैं।
यूसीसी लागू होने से सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के नियम समान होंगे। संपत्ति के उत्तराधिकार और बंटवारे के नियम एक जैसे होंगे। गोद लेने और भरण-पोषण के लिए समान कानूनी प्रावधान होंगे। धार्मिक पहचान के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान नागरिक कानून लागू होगा।
भारतीय संविधान में समान नागरिक संहिता यानी UCC का उल्लेख संविधान के भाग-4 के अनुच्छेद 44 में किया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य पूरे देश में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। हालांकि, यह नीति-निर्देशक सिद्धांत है, इसलिए इसे लागू करना सरकार के विवेक पर निर्भर करता है। यह न्यायालय द्वारा बाध्यकारी नहीं है।