वंदे मातरम की अनिवार्यता पर पश्चिम सरकार में मंत्री दिलीप घोष का बयान आया है। इसके साथ ही, बंगाल में गाय की कुर्बानी न देने के मुस्लिम समुदाय के फैसले का स्वागत किया है। पढ़ें पूरी खबर...
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष (Dilip Ghosh, Minister in the Government of West Bengal) ने राज्य के मदरसाओं में वंदे मातरम (Vande Mataram) की अनिवार्यता पर बड़ा बयान दिया है। घोष ने कहा कि जहां पर सरकारी पैसे लगेंगे, वहां पर सरकारी नियम भी लागू होंगे। राष्ट्रगीत हर जगह गाया जाना चाहिए। पूरे देश में यही व्यवस्था है।
दिलीप घोष ने विकास कार्यों को तेज करने और सरकारी खर्च कम करने के लिए नई रणनीति की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब सरकार एक ही जगह पर बड़ी-बड़ी बैठकें नहीं करेगी, जिसमें अनावश्यक पैसा खर्च होता है। इसके बजाय राज्य को पांच हिस्सों में बांटकर अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें आयोजित की जाएंगी।
शुभेन्दु सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सरकार ने फैसला किया है कि हम पश्चिम बंगाल को पांच हिस्सों में बांट रहे हैं। 20 मई को सिलीगुड़ी में पांच जिलों की बैठक हुई। 21 तारीख को दुर्गापुर में पांच जिलों की बैठक हो गई। इसी तरह आगे भी सिलसिला जारी रहेगा। इन बैठकों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, स्थानीय विधायक, डीएम, बीडीओ समेत सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहेंगे। कोई पब्लिसिटी नहीं, सिर्फ काम की बात होगी।
बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर दिलीप घोष ने साफ कहा कि उन्हें केवल केस दर्ज करके या खाना खिलाकर रखने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे कई सालों से यहां रह रहे हैं और सारे फायदे उठा रहे हैं। हमें उन्हें वापस भेजना होगा। इस मामले पर चर्चा चल रही है। घोष ने आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में पुराने कानूनों का पालन नहीं किया गया और पश्चिम बंगाल को भारत से अलग देश जैसा बनाने की कोशिश की गई।
फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी द्वारा मुसलमानों से बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील पर दिलीप घोष ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि मुस्लिम समुदाय ने यह अपील की है। गाय की कुर्बानी कोई धार्मिक परंपरा नहीं है और इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।