
West Bengal Public Safety Bill: बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को 'द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल 2026' (पब्लिक सेफ्टी बिल) को भारी बहुमत से पास कर दिया।
इस बिल के पक्ष में 176 वोट पड़े जबकि 41 विधायकों ने इसका विरोध किया। इस कानून को राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे लेकर सवाल भी उठाए हैं।
विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस और CPI-M पर निशाना साधा। उन्होंने राजनीतिक हिंसा और पुराने दौर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल की राजनीति में हिंसा को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा, 'इसे लागू करने से पहले, मैं यह बताना चाहता हूं कि पिछली सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया था। बंगाल की जनता ने EVM के जरिए आपको नकार दिया है। आप विपक्ष तो बना पाए हैं, लेकिन वह मजबूत नहीं है।
शुभेन्दु अधिकारी ने कहा कि यह बिल पहले ही कई राज्यों में अलग-अलग नामों से पेश किया जा चुका है। महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और झारखंड ने इसे लागू भी कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने CPI-M पर आरोप लगाते हुए कहा, उन्होंने कहा कि हमने देखा कि कैसे CPI-M ने बंगाल की राजनीति में गुंडा संस्कृति को बढ़ावा दिया हैं।
मुख्यमंत्री ने TMC पर मुस्लिम समुदाय को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'साल 2019 से हमने देखा है कि पिछली सरकार ने एक खास समुदाय को अपना समर्थन देने का भरोसा दिलाया था। हमने CPI-M के वोटर हरागोबिंदा दास और चंदन दास की हत्या और उनके परिवारों की मुश्किलों को भी देखा है।'
उन्होंने कहा, 'हम इस कानून का गलत इस्तेमाल नहीं करेंगे। हमें यह पक्का करना होगा कि सार्वजनिक या निजी संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे। इस कानून को सख्ती से लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है।'
इस नए कानून का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा मजबूत करना और संगठित अपराधों पर सख्त नियंत्रण करना है। इसमें उन गतिविधियों को भी शामिल किया गया है जो जनता में डर, दहशत या असुरक्षा पैदा करती हैं। इसके तहत अवैध खनन, बिना अनुमति रेत की खुदाई और वन्य संसाधनों से जुड़ी अवैध गतिविधियों को भी अपराध माना जाएगा।
इस बिल में सबसे ज्यादा चर्चा निवारक हिरासत (Preventive Detention) को लेकर हो रही है। अगर सरकार या अधिकृत अधिकारी को लगता है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है, तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है। इस कानून में जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को भी ऐसे आदेश देने का अधिकार दिया गया है। कानून के अनुसार यह अपराध गैर-जमानती (Non Bailable) होंगे, यानी बिना वारंट गिरफ्तारी और आसानी से जमानत नहीं मिलेगी।