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पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज UCC बिल पर TMC के दोनों गुटों की होगी राजनीतिक परीक्षा, अब तक किन-किन राज्यों में हो चुका पास?

TMC split over UCC Bill: पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज यूसीसी विधेयक पेश किया जाएगा। टीएमसी के दोनों गुटों ने इस बिल का विरोध किया है।
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West Bengal UCC Bill 2026

UCC विधेयक पर सदन में TMC के दोनों गुटों की होगी अग्निपरीक्षा (Photo-IANS)

West Bengal UCC Bill 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को शुभेन्दु सरकार समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) विधेयक पेश करने जा रही है। अब सबकी नजर विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद TMC के दो गुटों पर है। दरअसल, यूसीसी विधेयक पेश करने के साथ मुकाबला सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ही नहीं, टीएमसी के दो गुटों के बीच भी है।

हालांकि ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी का गुट यूसीसी बिल का विरोध कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा में दोनों की अलग-अलग रणनीति और अलग वक्ता होंगे। 

सदन में UCC का विरोध करने के लिए TMC के दोनों गुटों ने अपनी-अपनी रणनीति तय कर ली है। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट सदन में अलग-अलग वक्ताओं और राजनीतिक तर्कों के साथ इस बिल का विरोध करेंगे। इसके अलावा राजनीतिक विरासत के असली प्रतिनिधि होने का भी दावा पेश करेंगे। 

ममता बनर्जी ने जताया विरोध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को अपने गुट के विधायकों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने विधायकों से सदन के अंदर और बाहर यूसीसी बिल का जोरदार विरोध करने को कहा है। पूर्व सीएम बनर्जी ने कहा कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना, सामाजिक सहमति और देश की विविधता पर सवाल उठता है। 

ऋतब्रत बनर्जी ने उठाया सवाल

वहीं टीएमसी के बागी गुट और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने भी यूसीसी विधेयक लाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पहले व्यापक संवाद होना चाहिए। ऋतब्रत ने कहा कि यह विधेयक बिना व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से सलाह-मशविरा किए बिना सदन में लाया जा रहा है। 

दो गुटों में बंटी टीएमसी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के मतभेद खुलकर सामने आ गए। पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, वहीं दूसरे गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। पार्टी के करीब 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया। ऐसे में अब सोमवार को UCC पर होने वाली बहस विधानसभा के अंदर दोनों गुटों की ताकत का पहला बड़ा प्रदर्शन होगी।

अब तक किन राज्यों में पास हो गया UCC

भारत में Uniform Civil Code (UCC) अब तक उत्तराखंड, गुजरात और असम में पास/लागू हो चुका है। उत्तराखंड फरवरी 2024 में UCC कानून पास करने वाला भारत का पहला राज्य बना और जनवरी 2025 में इसे लागू भी कर दिया गया। इसके बाद गुजरात ने मार्च 2026 में UCC बिल पास किया, जबकि मई 2026 में असम विधानसभा ने UCC बिल 2026 पास कर पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया (जिसमें अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है)। इन राज्यों में UCC विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना आदि मामलों में धर्म-निरपेक्ष समान कानून लागू करता है।

क्या है UCC?

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों के लोगों पर एक समान कानून लागू करना है। इससे अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

भाजपा का कहना है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और धर्म के आधार पर होने वाले कानूनी भेदभाव को खत्म किया जा सकेगा।