राष्ट्रीय

Bengal Election 2026: बंगाल में मतदाता सूची पर संग्राम! सड़क पर कांग्रेस, दफ्तरों में भिड़े BJP-TMC, सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत

Jan 20, 2026
Bengal Voter List Controversy
कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते कांग्रेसी। (फोटो: ANI)

ElectionCommission: पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों (West Bengal Election 2026) से पहले 'वोटर लिस्ट' ((Voter List Revision SIR) ) पर सियासी ​संग्राम छिड़ गया है। मंगलवार को कोलकाता की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर जम कर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, मुर्शिदाबाद में भाजपा और टीएमसी (Murshidabad BJP TMC Clash) समर्थकों के बीच हिंसक झड़प की खबरें आईं, जिसके बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर राज्य में चल रहे 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। कार्यकर्ताओं ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से बंगाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

मुर्शिदाबाद में भिड़े भाजपा-टीएमसी, फॉर्म फाड़ने का आरोप

मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के दौरान मुर्शिदाबाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। लालबाग एसडीओ कार्यालय के बाहर टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हुई। भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी विधायक असित मजूमदार ने अपने समर्थकों के साथ दफ्तर में घुस कर फॉर्म-7 (नाम हटाने का फॉर्म) फाड़ दिए। हालांकि, विधायक ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे निराधार बताया है।

सुप्रीम कोर्ट की एंट्री (Supreme Court Bengal Verdict)

इस पूरे विवाद के बीच मामला देश की शीर्ष अदालत पहुंचा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि 'तार्किक विसंगतियों' (Logical Errors) की श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करें।

नामों का प्रकाशन हो: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि प्रभावित व्यक्तियों की सुविधा के लिए उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक और वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं।

कर्मचारियों की कमी: सरकार स्टाफ दे: अदालत

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे चुनाव आयोग को पर्याप्त स्टाफ मुहैया कराएं ताकि आपत्तियों और दस्तावेजों की जांच सुचारू रूप से हो सके।

मतदाता सूची संशोधन: महत्वपूर्ण तारीखें और प्रक्रिया

बंगाल में मतदाता सूची संशोधन की अंतिम तिथि 15 जनवरी से बढ़ा कर 19 जनवरी कर दी गई थी। अब इन दावों और आपत्तियों पर 7 फरवरी तक सुनवाई चलेगी। बंगाल की आखिरी मतदाता सूची 14 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

अधीर रंजन चौधरी (कांग्रेस): "चुनाव आयोग को यह तय करना चाहिए कि एक भी वैध मतदाता का नाम राजनीतिक द्वेष के चलते सूची से बाहर न हो।"

भाजपा बंगाल: "टीएमसी हार के डर से अब गुंडागर्दी पर उतर आई है और सरकारी दफ्तरों में फॉर्म फाड़े जा रहे हैं।"

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

"प्रक्रियात्मक अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी; प्रभावित व्यक्तियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए।"

विसंगतियों' वाली सूची तुरंत चस्पा करने की हिदायत

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वार्ड स्तर पर 'विसंगतियों' वाली सूची तुरंत चस्पा करें। मुर्शिदाबाद की घटना के बाद राज्य के संवेदनशील मतदान केंद्रों और एसडीओ कार्यालयों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

सबसे ज्यादा विवाद 'मृत' या 'शिफ्टेड' वोटरों के नाम पर

बहरहाल मतदाता सूची संशोधन की इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा विवाद 'मृत' या 'शिफ्टेड' वोटरों के नाम हटाने (फॉर्म-7) को लेकर हो रहा है। राजनीतिक दलों को डर है कि इस प्रक्रिया की आड़ में उनके समर्थकों के नाम जानबूझकर हटाए जा सकते हैं। यही कारण है कि वार्ड स्तर पर राजनीतिक एजेंट अब एक-एक फॉर्म की निगरानी कर रहे हैं, जिससे झड़प की आशंकाएं बढ़ रही हैं।

Updated on:
20 Jan 2026 07:54 pm
Published on:
20 Jan 2026 07:51 pm
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