राष्ट्रीय

राहुल गांधी ने जिसे बताया ‘गद्दार दोस्त’ उस पर क्यों मेहरबान है बीजेपी, दादा रह चुके है पूर्व सीएम

पंजाब की राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा भेजकर एक बड़ा दांव चला है। लुधियाना लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद बिट्टू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बनाए रखना और फिर राजस्थान से राज्यसभा भेजना भाजपा की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है।

2 min read
Mar 03, 2026
रवनीत सिंह बिट्टू

लोकसभा चुनाव में हार झेलने के बावजूद रवनीत सिंह बिट्टू पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मेहरबानी कम नहीं हुई है। पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिट्टू को पार्टी ने राज्यसभा की सीट देकर एक बार फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह फैसला बीजेपी की लंबी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ सिख समुदाय में प्रभाव बढ़ाना शामिल है।

ये भी पढ़ें

Israel Iran War: अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बताया प्रेसिडेंट ट्रंप का क्या है लक्ष्य, ऑपरेशन मिडनाइट हैमर पर किया खुलासा

कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने का सफर

51 वर्षीय रवनीत सिंह बिट्टू लंबे समय तक कांग्रेस के वफादार रहे। वे 2009 में आनंदपुर साहिब और 2014 व 2019 में लुधियाना से कांग्रेस के सांसद चुने गए। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च में उन्होंने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। यह फैसला पंजाब कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था। बीजेपी ने उन्हें लुधियाना से टिकट दिया, लेकिन वे कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से करीब 21 हजार वोटों से हार गए।

हार के बाद भी मंत्री बनाए गए

लोकसभा हार के बावजूद बीजेपी ने बिट्टू को नहीं छोड़ा। जून 2024 में नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल 3.0 में उन्हें राज्य मंत्री (रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) बनाया गया। मंत्री बनने के बाद सदन की सदस्यता जरूरी होने से अगस्त 2024 में राजस्थान से उन्हें राज्यसभा भेजा गया, जहां वे निर्विरोध चुने गए क्योंकि कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारा। उनका कार्यकाल जून 2026 तक था, लेकिन अब पार्टी उन्हें दोबारा या हरियाणा से राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है।

बीजेपी की रणनीति क्या है? इनसाइड स्टोरी

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक, बिट्टू पर मेहरबानी के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण उनकी सिख पहचान है। बिट्टू अलगाववादी तत्वों के खिलाफ मुखर रहे हैं और मोदी सरकार में प्रमुख सिख चेहरा हैं। पार्टी पंजाब में अपनी स्थिति कमजोर होने के कारण बिट्टू जैसे चेहरे का इस्तेमाल कर रही है। हरियाणा में राज्यसभा चुनाव अप्रैल 2026 में होने हैं, जहां दो सीटें खाली होंगी। बीजेपी बिट्टू को हरियाणा से उतारकर पंजाब-हरियाणा सीमा पर प्रभाव बढ़ाना चाहती है। हरियाणा में सीएम नायब सिंह सैनी का पंजाब से जुड़ाव भी इस रणनीति से जुड़ा है।

इसके अलावा, बीते माह संसद में राहुल गांधी द्वारा बिट्टू को 'गद्दार दोस्त' कहे जाने को बीजेपी ने सिख अपमान से जोड़ा और इसे सिख वोटरों को लुभाने का मौका बनाया। बिट्टू की परिवारिक विरासत (बेअंत सिंह की हत्या खालिस्तानी आतंकवादियों ने की थी) भी पार्टी के लिए अलगाववाद विरोधी नैरेटिव मजबूत करती है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस इसे अवसरवादिता बता रही है, लेकिन बीजेपी का मानना है कि 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बिट्टू जैसे नेता पार्टी की स्थिति मजबूत करेंगे। यह फैसला दिखाता है कि बीजेपी चुनावी हार को रणनीतिक जीत में बदलने में माहिर है।

बिट्टू को राहुल गांधी ने कहा था 'गद्दार दोस्त'

आपको बता दें कि पिछले महीने संसद भवन के परिसर में कांग्रेस सांसद प्रदर्शन कर रहे थे तभी राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच जुबानी जंग देखने को मिली थी। बिट्टू प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसद के पास से गुजर रहे थे तभी राहुल गांधी ने कहा था कि नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस आ जाओगे (कांग्रेस में)। इस पर उन्होंने देश के दुश्मन… कहते हुए बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और फिर संसद के अंदर दाखिल हो गए थे।

ये भी पढ़ें

बंदूक खरीदने के लिए बेचे मां के गहने! पप्पू यादव ने खुद सुनाया बचपन का किस्सा, कहा- बदला लेने के लिए…

Published on:
03 Mar 2026 03:10 pm
Also Read
View All

अगली खबर