राष्ट्रीय

NCERT BOOK ROW: धर्मेंद्र प्रधान पर गिरेगी गाज या नपेंगे अफसर?

NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का उल्लेख होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे न्यायपालिका की छवि खराब करने की गहरी साजिश बताया और कहा कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
4 min read
• •
Updated: 1 Mar 2026, 9:55 AM IST
Narendra modi and dharmendra pradhan
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। (फोटो- पत्रिका डिजाइन)

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एक बार फिर मुश्किल में घिर गए हैं। इस बार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training - NCERT) की वजह से।

एनसीईआरटी ने आठवीं की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक अंश जोड़ दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है।

UGC को लेकर भी हुआ था बवाल

इस बार न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट) गुस्से में है। एनसीईआरटी के माफी मांगने और किताब वापस लेने के बावजूद गुस्सा शांत नहीं हुआ है।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने साफ कह दिया है, ‘हमें जानना है, इसके पीछे कौन है। गोली चलाने वाले नो चला दी, लहूलुहान तो न्यायपालिका हुई है।’खुद प्रधान ने भी खेद जताते हुए कहा है कि वह ज़िम्मेदारी तय करेंगे।

NCERT की किताब का वह अंश जिस पर विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने किताब को बैन कर दिया।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से यह खबर भी चलाई जा रही है कि प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे का जिक्र किया और धर्मेंद्र प्रधान के सपष्टीकरण से वह संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने सवाल किया- एनसीईआरटी की किताबों में क्या छपेगा, क्या नहीं, यह कौन देख रहा है?

'नाखुश' प्रधानमंत्री ने प्रधान से कहा कि इस मामले में ज़िम्मेदारी तो तय करनी ही होगी। न्यायपालिका का रुख देख कर ऐसा लग रहा है कि सरकार में से किसी पर गाज गिरनी तय है। प्रधान ने कहा है किताब में न्यायपालिका से जुड़ी विवादित बातें कैसे छप गईं, इसका पता लगाया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।

किस पर गिरेगी गाज?

सवाल यह है कि गाज मंत्री पर गिरेगी या किसी अफसर पर? न्यायपालिका पर एक विवादित बयान देने के बाद ही किरण रिजिजू को कानून मंत्रालय से हाथ धोना पड़ गया था। हालांकि, प्रधान का इस विवाद से कोई सीधा नाता नहीं है। न ही इस पर उन्होंने कोई विवादास्पद रुख अख़्तियार किया है।

मोदी-शाह के भरोसेमंद माने जाते हैं धर्मेंद्र

धर्मेंद्र प्रधान आम तौर पर विवादों से दूर रहने वाले और प्रधानमंत्री के एजेंडे को अमलीजामा पहनाने वाले नेता माने जाते हैं। वह नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों के भरोसेमंद माने जाते हैं।

वह उन चुनिंदा नेताओं में हैं, जो मोदी की तीनों सरकारों में मंत्री रहे हैं। पहली बार 2014 में जब वह मंत्री बने तो महज 45 साल के थे।

उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसा अहम मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) दिया गया। छह महीने में ही उन्होंने बतौर मंत्री अपना ग्राफ ऊपर कर लिया। उन्होंने सबसे लंबे समय तक पेट्रोलियम मंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया।

पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए लागू कराई प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना

प्रधान के पेट्रोलियम मंत्री रहते ही 'उज्ज्वला' जैसी महत्वाकांक्षी योजना लागू की गई। यह योजना मोदी सरकार के लिए क्रांतिकारी साबित हुई।

गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन देने की यह योजना मई 2016 में शुरू की गई और एक ही साल (जुलाई 2017) में ढाई करोड़ महिलाओं को इसका फायदा पहुंचाया गया।

2019 के चुनाव में इसे मोदी सरकार ने खूब भुनाया और जीत में इस योजना का भी अहम योगदान माना गया। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इस मुद्दे को खूब भुनाया था।

2017 में 'Skill India' का बढ़ाया Scale

सितंबर 2017 में जब प्रधान को कौशल विकास (Skill Development) मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया तो वहां भी वह तुरंत नरेंद्र मोदी के विजन को पूरा करने में लग गए।

चुनाव में 20 महीने से भी कम रह गए थे, जब उन्हें यह अतिरिक्त ज़िम्मेदारी मिली थी। प्रधान ने 'स्किल इंडिया' पर प्रधानमंत्री का 40 मिनट का एक पुराना भाषण चलाया और हर शब्द को ध्यान से सुना। यहीं से उन्हें अपने लिए टास्क मिल गया।

इसे पूरा करने के लिए उन्होंने वोकेशनल ट्रेनिंग पर फोकस बढ़ाया और निजी संस्थानों से टाय-अप के जरिए युवाओं के 'स्किल डेवलपमेंट' का प्लान बना कर अमल शुरू करा दिया। यह योजना भी प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है और वह लगातार इसकी उपलब्धियां गिनाते हैं।

पेट्रोल पंपों पर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए नीति बनी

नवम्बर 2016 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की और 'कैशलेस इकॉनमी' की वकालत की तो धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत अपने मंत्रालय के अफसरों की बैठक बुलाई और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के तरीकों पर मंथन किया। इसके बाद पेट्रोल पंपों पर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए नीति बनी।

पार्टी में भी मिली बड़ी जिम्मेदारी

शिक्षा मंत्रालय (2021 से) में भी वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति सहित मोदी सरकार के एजेंडे को बिना किसी विवाद के लागू कर रहे हैं।
प्रधान ने सरकार ही नहीं, पार्टी में भी दी गई जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। वह राजनीति में सीढ़ी-दर-सीढ़ी नीचे से ऊपर उठे हैं। इस नाते उन्हें संगठन का भी पूरा अनुभव रहा है।

1983 में शुरू हुआ प्रधान का राजनीतिक सफर

प्रधान का राजनीतिक सफर 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से शुरू हुआ। तब वह तलचर कॉलेज में 12वीं में पढ़ रहे थे। 1985 में वह छात्र संघ के अध्यक्ष बने।

इसके बाद एबीवीपी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया। 2004 से 2006 के बीच वह भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। साल 2000 में प्रधान पालाहार से विधायक और 2004 में देवगढ़ (ओड़िशा) से सांसद बने।

बिहार के चुनाव प्रभारी भी बने प्रधान

प्रधान बीजेपी के महासचिव भी रहे। उन्हें पार्टी ने बिहार का चुनाव प्रभारी भी बनाया और कर्नाटक, उत्तराखंड, झारखंड में पार्टी मामलों के प्रभारी का भी काम दिया। प्रधान ने पार्टी को कहीं निराश नहीं किया।

प्रधान को ओड़िशा में बीजेपी की जमीन तैयार करने वाला नेता माना जाता है। राज्य में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बीजेपी की शानदार जीत में उनका बड़ा रोल माना जाता है।

प्रधान पहले ओड़िया नेता हैं, जिन्हें दूसरे राज्य से राज्यसभा का सांसद बनाया गया। 2012 में पहली बार उन्हें बिहार और 2018 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा का टिकट मिला।

एनसीईआरटी किताबों में पहले भी हुए हैं बदलाव

Updated on:
1 Mar 2026, 9:55 AM IST
Published on:
Also Read
View All
Double Murder case solved: सूरजपुर डबल मर्डर का खुलासा, शिक्षिका सहेली के पति ने की थी मां-बेटे की नृशंस हत्या, पैसे देने से मना करने पर मार डाला

वोटिंग से पहले डॉ. संजीव के घर STF पहुंचने पर भड़की RJD, मनोज झा बोले- पटना से दिल्ली तक दहशत, जनता देगी जवाब

भगवंत मान का अमित शाह पर पलटवार, बोले- पंजाब में सरकार 3.25 करोड़ लोगों की मर्जी से बनेगी, शाह की इच्छा से नहीं

Delhi Cyber Fraud Gang: दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, पांच बैंकरों समेत छह गिरफ्तार; क्रिप्टोकरेंसी से विदेश भेजते थे पैसा

PM मोदी को याद आए स्वामी चिन्मयानंद, बोले- 33 साल पीछे चला गया, गुजरात CM बनने से पहले हुई थी मुलाकात