
चंडीगढ़ की एक महिला वकील सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्य कांत के सामने खुलकर रो पड़ी। उसने कहा कि वह लगातार उत्पीड़न झेल रही है और उसके केस में कोई वकील खड़ा होने को तैयार नहीं है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली इस महिला ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक रूप से मदद मांगी। लेकिन सीजेआई सूर्य कांत ने सख्ती से कहा कि इस तरह सुओ मोटो नहीं लिया जा सकता।
महिला वकील ने बताया कि वह हाईकोर्ट में केस लड़ रही है, लेकिन भय और दबाव के कारण कोई भी वकील उसके साथ नहीं आ रहा।
उसने चीफ जस्टिस के सामने अनुरूष करते हुए कहा- मैं उत्पीड़न का शिकार हूं। मेरे केस में कोई नहीं दिख रहा। क्या ऐसे में सुओ मोटो लिया जा सकता है?
कोर्ट में यह बात कहते हुए उसकी आवाज में हताशा साफ झलक रही थी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने महिला वकील की बात ध्यान से सुनी। लेकिन उन्होंने साफ कहा- इस तरह सुओ मोटो नहीं लिया जा सकता। हाईकोर्ट में पिटीशन दाखिल कीजिए।
CJI ने जोर दिया कि हर मुद्दे को सही प्रक्रिया से ही निपटाया जाना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अक्सर कहता है कि हाईकोर्ट अपनी जिम्मेदारी निभाए। सीजेआई का यह बयान भी उसी दिशा में है। उन्होंने महिला को सलाह दी कि वह सही तरीके से हाईकोर्ट में याचिका दायर करे।
इसके अलावा, सीजेआई ने बुधवार को एक और महत्वपूर्ण मामले की। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें उसने नैनीताल से हाई कोर्ट बेंच को दूसरी जगह ले जाने पर जनमत संग्रह कराने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। यह रोक हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की सीधी अपील के बाद लगाई गई थी।
CJI सूर्य कांत ने कहा- हाई कोर्ट को न्यायिक पक्ष में ऐसे आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। हाई कोर्ट का आदेश रद्द किया जाता है। उत्तराखंड हाई कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर राज्य सरकार के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं का समाधान करे।
उन्होंने आगे कहा- हमें जानकारी मिली है कि राज्य सरकार ने हल्द्वानी जिले में हाई कोर्ट के निर्माण के लिए जमीन तय कर दी है। 6 हफ्ते के अंदर सभी मंजूरी मिलने के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए और जमीन हाई कोर्ट को सौंप दी जाए।