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मोदी कैबिनेट ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति 2026 को दी मंजूरी, जानें इससे क्या होगा फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में उर्वरक विभाग के आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (एनआईपीयू-2026) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
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भारत

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kamlesh sharma

Jul 15, 2026

PM Narendra Modi

PM Narendra Modi inspects the miniature model of the upcoming urea plant । ( File Photo: IANS/PIB)

Modi Cabinet Decisions Today : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में उर्वरक विभाग के आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (एनआईपीयू-2026) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस नीति का उद्देश्य देश में गैस आधारित यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए नए निवेश को प्रोत्साहित करना है। इससे घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ेगा और देश को यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

नई नीति में किए कई महत्वपूर्ण बदलाव

सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय निवेश नीति-2012 (एनआईपी-2012) की तुलना में नई नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इनमें अधिक पारदर्शिता के लिए स्थिर और परिवर्ती लागतों को अलग-अलग करना, आरओई (रिटर्न ऑन इक्विटी) की व्यवहार्य सीमा तय करना, जिसमें न्यूनतम 12 प्रतिशत और अधिकतम 16 प्रतिशत का प्रावधान है, तथा विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करने के लिए चार वर्ष बाद प्रचलित विनिमय दरों के आधार पर स्थिर लागत को रुपए में परिवर्तित करने की व्यवस्था शामिल है।

250 करोड़ रुपए से अधिक की बचत का अनुमान

सरकारी बयान के मुताबिक, इन प्रावधानों से एनआईपीयू-2026 के तहत स्थापित होने वाले प्रत्येक नए प्लांट पर एनआईपी-2012 की तुलना में 250 करोड़ रुपए से अधिक की बचत होने का अनुमान है। नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना एनआईपीयू-2026 के दायरे में की जाएगी। इससे पहले यूरिया क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए उर्वरक विभाग ने वर्ष 2012 में नई निवेश नीति (एनआईपी-2012) तैयार की थी। इसका उद्देश्य मौजूदा संयंत्रों के आधुनिकीकरण, विस्तार, बंद पड़ी (ब्राउनफील्ड) इकाइयों को दोबारा शुरू करना और नई परियोजनाओं की स्थापना को बढ़ावा देना था।

एनआईपी-2012 के तहत कुल छह नई यूरिया इकाइयों की स्थापना की गई। इनमें से चार इकाइयां नामित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) के संयुक्त उद्यम (जेवीसी) के माध्यम से और दो इकाइयां निजी कंपनियों द्वारा स्थापित की गईं। हालांकि, इस नीति के तहत नए निवेश की अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।

वर्तमान में 33 यूरिया विनिर्माण इकाइयां संचालित

वर्तमान में देश में 33 यूरिया विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है। सरकार ने कहा कि घरेलू यूरिया उत्पादन अभी भी देश की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण मांग और आपूर्ति के अंतर को भरने के लिए यूरिया का आयात करना पड़ता है। उर्वरक विभाग को देश में नई यूरिया इकाइयों की स्थापना के लिए कई प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद अब इन परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

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