नीमच

नीमच में आस्था का केंद्र बना प्रसिद्ध रामझर महादेव मंदिर

नीमच जिले में श्रावण माह के तीसरे सावन सोमवार को 40 गांवों से पहुंचेगी कावड़ यात्राएं, 17 अगस्त को लगेगा एक दिवसीय मेला, भंडारे का होगा आयोजन, मिनी हरिद्वार के नाम से प्रसिद्ध है रामझर महादेव मंदिर
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Aug 05, 2026
Ramjhar Mahadev Temple
Ramjhar Mahadev Temple

नीमच. लंबे इंतजार के बाद सक्रिय हुए मानसून ने जीरन तहसील के अंतर्गत चीताखेड़ा-दलपतपुरा के बीच झील क्षेत्र में स्थित 11वीं शताब्दी के प्राचीन रामझर महादेव तीर्थ की प्राकृतिक सुंदरता को पुनर्जीवित कर दिया है। इसे 'मिनी हरिद्वार' के नाम से भी जाना जाता है। पिछले तीन दिनों से हो रही रिमझिम वर्षा के कारण यहां की पहाड़ी, हरियाली और घाटी नई आभा से दमक उठी है। सावन माह शुरू होते ही काफी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक भगवान रामझर महादेव के दर्शन करने और इस मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचने लगे हैं। यह तीर्थ स्थल अपनी ऐतिहासिक महत्ता और वर्षा ऋतु में विशेष रूप से निखरने वाली प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है। झील क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां का वातावरण शांत और मनोहारी बना रहता है। मानसून की पहली वर्षा ने पूरे क्षेत्र में एक नई ताजगी भर दी है, जिससे स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। पहाड़ों से गिरते झरने और घनी हरियाली पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है।

800 वर्ष से अधिक पुराना है तीर्थ

रामझर महादेव मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र है। मंदिर समिति के अनुसार आगामी 17 अगस्त को सावन माह के तीसरे सोमवार पर आसपास के 40 गांवों से कावड़ यात्राएं रामझर महादेव पहुंचेंगी। इस अवसर पर एक दिवसीय विशाल मेले के साथ श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियां मंदिर समिति ने शुरू कर दी हैं। रामझर महादेव मंदिर ग्वालियर स्टेट के समय का लगभग 800 वर्ष से अधिक प्राचीन माना जाता है। मान्यता है कि नाथ पंथ के सिद्धयोगी रामनाथ महाराज ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थीए जिसके बाद से यह स्थान रामझर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर विशाल शिलाओं से निर्मित है और इसकी स्थापत्य कला इसे विशेष पहचान देती है।

प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम

बारिश के बाद आसपास की पहाड़ी और घाटी में हरियाली लौट आई है। सामान्य वर्षों में पहाड़ी से बहने वाली जलधाराएं और नदी की कल कल ध्वनि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण रहती है। हालांकि इस बार क्षेत्र में अच्छी बारिश के बावजूद नदी में तेज बहाव अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन मानसून की दस्तक से पूरा क्षेत्र फिर से गुलजार हो गया है।

गर्भगृह में विराजित है शिव परिवार

मंदिर के गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग के साथ भगवान शिव परिवार की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां भगवान गणेश कार्तिकेय और माता पार्वती की प्रतिमाएं अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य कला के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। गर्भगृह के बाहर नंदी महाराज की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जो मंदिर की धार्मिक गरिमा को और बढ़ाती है। मंदिर के पुजारी विष्णु गिर गोस्वामी ने बताया कि यह अत्यंत सिद्ध एवं प्राचीन मंदिर है जहां दूर दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर की पूजा-अर्चना और व्यवस्थाओं का दायित्व निभा रही है।

भव्य धार्मिक आयोजन

हर वर्ष सावन माह के तीसरे सोमवार और कार्तिक पूर्णिमा पर यहां भव्य धार्मिक आयोजन एवं मेला आयोजित किया जाता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष केशुराम जाट ने बताया कि रामझर महादेव में दर्शन करने से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव होता है और यहां आने वालों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 17 अगस्त को आयोजित होने वाले मेले में 40 गांवों से हजारों कांवड यात्री जल लेकर पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जनसहयोग से भंडारे की व्यवस्था भी की जाएगी।

सुरक्षा बरतने की अपील

सावन माह में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति और पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से नदी-नालों के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है, ताकि धार्मिक यात्रा सुरक्षित और सुखद बनी रहे।

Updated on:
05 Aug 2026 01:23 pm
Published on:
05 Aug 2026 01:22 pm