1 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘अगर मैदान छिन गए तो बचपन सड़कों पर ही खेलेगा..’ नीमच में खिलाड़ियों का अनोखा आंदोलन

Save Historic Sports Ground : ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने की जद्दोजहद, 'मैदान बचाओ समिति' के बैनर तले खिलाड़ियों और युवाओं ने सड़क पर फुटबॉल खेलकर अनोखा प्रदर्शन किया।
3 min read
Google source verification
Save Historic Sports Ground

Save Historic Sports Ground (ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने की जद्दोजहद Photo Source- Input)

Neemuch News : क्या हो जब किसी खिलाड़ी से उसका मैदान और किसी बच्चे से उसका बचपन छीन लिया जाए ? उसके पास खेलने के लिए बचती हैं तो बस ये धूल भरी और खतरनाक सड़कें। इसी गहरे दर्द और कड़वे सच को बयां करते हुए शनिवार सुबह मध्य प्रदेश के नीमच शहर के भारत माता चौराहे पर एक ऐसा नजारा दिखा, जिसने हर राहगीर के कदम रोक दिए और सोचने पर मजबूर कर दिया।

शहर के ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने की जद्दोजहद में 'मैदान बचाओ समिति' के बैनर तले खिलाड़ियों, युवाओं और नागरिकों ने सड़क पर ही क्रिकेट और फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया। यह कोई खेल नहीं था, बल्कि शासन-प्रशासन की आंखें खोलने के लिए किया गया एक बेहद मार्मिक और अनोखा प्रदर्शन था।

शिक्षा से बैर नहीं, पर खेल मैदान भी जरूरी

इस पूरे आंदोलन की जड़ में है शहर के प्रमुख खेल मैदान पर प्रस्तावित 'संदीपनी हायर सेकेंडरी स्कूल' का निर्माण। समिति का दर्द इस बात का है कि कंक्रीट के इस जंगल में वैसे ही खुली हवा और मैदान कम होते जा रहे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि, उनकी लड़ाई शिक्षा या स्कूल के खिलाफ बिल्कुल नहीं है। वे चाहते हैं कि, संदीपनी हायर सेकेंडरी स्कूल का निर्माण शहर की किसी अन्य उपयुक्त वैकल्पिक भूमि पर किया जाए। शिक्षा और खेल दोनों समाज के लिए जरूरी हैं, इसलिए दोनों का संतुलन न बिगाड़ा जाए। ऐतिहासिक खेल मैदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।

सड़क पर उतरने की मजबूरी और भविष्य की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर बल्ला घुमाकर और फुटबॉल को किक मारकर यह संदेश दिया कि, अगर आज इस मैदान पर कंक्रीट की इमारत खड़ी कर दी गई तो शहर के हजारों खिलाड़ियों के पास अभ्यास के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। आज का यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन कल की हकीकत बन जाएगा, जब मजबूर होकर बच्चों को ट्रैफिक के बीच सड़कों पर ही अपना बचपन गुजारना पड़ेगा।

आंदोलनकारियों की आवाज़

-समिति के प्रमुख सदस्य मुर्तजा डेरकी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि, 'यह मैदान सिर्फ मिट्टी का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि हमारे शहर के खेल इतिहास की धड़कन है। यहां से कई खिलाड़ियों ने अपने सपने बुने हैं। अगर इस मैदान पर इमारत बन गई तो हम सिर्फ एक जमीन नहीं, बल्कि शहर का खेल भविष्य खो देंगे।

-वहीं, बाबा ने कहा कि, 'आज हमने सड़क पर खेलकर जो दिखाया है, वो कोई नाटक नहीं बल्कि भविष्य की एक डरावनी तस्वीर है। अगर बच्चों से उनके मैदान छीन लिए जाएंगे, तो वे कहां जाएंगे? क्या हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे मोबाइल स्क्रीन में सिमट जाएं या इन खतरनाक सड़कों पर खेलें?'

-कीर्ति पंचोली का कहना है कि, 'हमारा ये आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के खिलाफ नहीं है। स्कूल बनना चाहिए, शिक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए शहर में और भी कई जगहें हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हमारी हाथ जोड़कर अपील है कि वे बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल के लिए कोई वैकल्पिक जगह तय करें।'

जनता से भावुक अपील

प्रदर्शन के अंत में 'मैदान बचाओ समिति' ने शहर की जनता, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से एक सुर में अपील की कि, इस मुहिम को सिर्फ कुछ खिलाड़ियों की मांग न समझा जाए। ये हर उस माता-पिता की लड़ाई है जो चाहता है कि उनका बच्चा खुली हवा में दौड़े, खेले और स्वस्थ रहे। अगर समय रहते इस मैदान को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में नीमच के पास पछताने के अलावा और कुछ नहीं बचेगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और आम नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी आंखों में अपने मैदान को खोने का डर और उसे बचाने का दृढ़ संकल्प साफ झलक रहा था।