जिला अस्पताल में 2 साल बाद भी नहीं लग पाया फायर सेफ्टी सिस्टम, दो बार ठेकेदार अपनी फिटिंग निकाल कर ले जा चुके हैं, जिम्मेदार हैं मौन, जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी के लिए लगाए तार लटक रहे हैं, नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सीढिय़ों पर ही लगा दिए गए हैं पाइप, प्रशासनिक उदासीनता को ठेगा दिखा रहा है अधूरा फायर सेफ्टी कार्य, पानी के लिए अबतक टैंक का निर्माण ही नहीं हो सका है।

नीमच. निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने पिछले महीने औचक निरीक्षण किया। कई खामियां गिनाई। यहां तक कि समयावधि निर्धारित कर कमियों को दूर करने की चेतावनी तक दी गई। दूसरी ओर जिला चिकित्सालय जो पूरी तरह से प्रशासनिक व्यवस्था के अधीन है, वहां आग लगने पर हालात पूरी तरह भगवान भरोसे रहेंगे। उसको लेकर जिले के आला अधिकारियों के कानों पर अबतक ‘जूं तक नहीं रेंगी’। फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने के लिए टेंडर हो चुके हैं, लेकिन काम जिस गति से चल रहा है उसे देख तो यही प्रतीत होता है इस साल तो पूरा होने से रहा।
फायर सेफ्टी की डिजाइन तक गलत थी
जिला चिकित्सालय में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने के लिए करीब दो-ढाई साल पहले भोपाल से टेंडर हुए थे। ठेकेदार ने कार्य भी प्रारंभ किया। चिकित्सालय भवन में फिटिंग भी की गई। आधे से अधिक हिस्से में फिटिंग करने के बाद पता चला कि जो फिटिंग की गई है वह टेंडर की शर्तों अनुरूप नहीं है। सिस्टम लगाने के लिए जो डिजाइन तैयार की गई थी वह तक गलत थी। इस संबंध में जब ठेकेदार को पता चला तो उसने फिटिंग की लाइन उखड़वाई। इससे भवन को नुकसान भी पहुंचा। इसके बाद लम्बे समय तक काम रुका रहा। जब काम शुरू किया तो फिर नई अड़चन आ गई। अस्पताल से जुड़े चिकित्सकीय स्टाफ ने बताया कि ठेकेदार के इंजीनियर जिस तरह से सिस्टम फिटिंग का कार्य कर रहे हैं। उससे देखा उनके अनुभव पर शक हो रहा है। सीढिय़ों से सटाकर पाइप लाइन बिछा दी गई है, जबकि सीढिय़ों पर ही पाइप निकालने के लिए पहले से छेद किए गए थे। अब शायद सीढिय़ों पर फायर सेफ्टी के लिए लगाए गए पाइप भी निकालना पड़ेंगे। अस्पताल से जुड़े स्टाफ ने ही बताया कि पूरे भवन में लगाए गए सिस्टम को अबतक दो बार उखाड़ा जा चुका है। इससे फिटिंग कमजोर भी हो गई है।
पानी स्टोरेज तक के नहीं इंतजाम
फायर सेफ्टी सिस्टम के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी संग्रहित करने के लिए अस्पताल परिसर में (पूर्व के साइकिल स्टैंड में) में विशाल टैंक बनाया जाना है। अबतक वहां केवल कुछ फीट की खुदाई भर की गई है। खोदा गया गड्ढा खुला पड़ा है। मानसून सिर पर है। बारिश शुरू होने पर गड्ढे में पानी भरेगा। वहां हादसे की आंशका भी बनी रहेगी। ठेकेदार द्वारा कार्य क्यों बंद कर दिया गया है इस संबंध में जिला अस्पताल के जिम्मेदारों के पास कोई ठोस उत्तर नहीं है। उनका कहना है कि फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने की पूरी प्रक्रिया भोपाल स्तर पर की जा रही है। कार्य रूका हुआ है इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है। जिला अस्पताल स्टाफ का ही कहना है जहां जिला प्रशासन निजी अस्पतालों पर फायर सेफ्टी को लेकर सख्ती बरत रहा है। दूसरी ओर जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों और कर्मचारियों की आग से सुरक्षा खतरे में हैं इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। न ही अबतक किसी प्रकार की प्रभावी पहल प्रशासन की ओर से होती दिखाई ही दे रही है।
इनका कहना है
सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने बताया कि यह बात सही है कि जिला चिकित्सालय में आग लगने पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। जिस ठेकेदार को काम दिया गया है उसने काम बंद कर रखा है। पूर्व में फिल्टिंग गलत लगा दी थी। उसे उखाडऩा पड़ी थी। टेंडर की पूरी प्रक्रिया भोपाल से की गई है। जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम लगने में हो रही देरी से कलेक्टर को भी अवगत करा दिया गया है। जिला अस्पताल में पिछले दो साल से कार्य अधूरा पड़ा है। कार्य में विलंब होने पर हम केवल पत्राचार ही कर सकते हैं।