
नीमच. नगरपालिका परिषद के विशेष सम्मेलन में करीब 350 नामांतरण प्रकरणों को मंजूरी मिलने के बीच एक नामांतरण प्रस्ताव ऐसा रहा, जिसने बैठक समाप्त होने के बाद कांग्रेस का राजनीतिक माहौल गरमा दिया। इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पार्षदों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया। परिषद कक्ष के बाहर नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति और वार्ड क्रमांक-37 की पार्षद के प्रतिनिधि शराफत अली के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और नोक-झोंक हो गई। मौके पर मौजूद अन्य पार्षदों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
शराफत अली ने आरोपों को बताया निराधार
पुरानी नगर पालिका भवन (बंगला नंबर-60) में बुधवार को आयोजित विशेष सम्मेलन में कुल 44 प्रस्ताव बहुमत से पारित किए गए। इनमें लगभग 350 नामांतरण प्रकरण भी शामिल थे। विवाद की जड़ बोहरा समाज की महिला सकीना के नामांतरण प्रस्ताव को माना जा रहा है, जिस पर नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति ने पहले आपत्ति दर्ज कराई थी। परिषद के भीतर शुरू हुई बहस बैठक समाप्त होने के बाद बाहर खुलकर सामने आ गई। विवाद के बाद शराफत अली ने कहा कि संबंधित नामांतरण सभी नियमों और तथ्यों के परीक्षण के बाद परिषद द्वारा स्वीकृत किया गया। उनका कहना था कि जब सैकड़ों नामांतरण एक साथ पारित किए गए, तब केवल एक प्रकरण पर आपत्ति उठाना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष प्रजापति ने यह कहा कि पैसे लेकर नामांतरण पास कराया गया। शराफत अली ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि बिना किसी प्रमाण के ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित महिला लंबे समय से परेशान थी और उसका नामांतरण पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा निशाने पर भाजपा थी, कांग्रेस नहीं
नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति ने पूरे घटनाक्रम को गलतफहमी बताया। उन्होंने कहा कि उनका आरोप कांग्रेस के किसी पार्षद पर नहीं, बल्कि भाजपा पार्षदों और नगर पालिका में कथित रूप से सक्रिय उस व्यवस्था पर था। जहां पैसे लेकर आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के उपयोग में बदलाव जैसे मामलों को मंजूरी दिलाने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथियों पर उन्होंने कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की और बाहर हुआ विवाद केवल उनके बयान को गलत ढंग से समझने के कारण हुआ।
बैठक से ज्यादा चर्चा बाहर के घटनाक्रम की
नगरपालिका परिषद की बैठक में पारित प्रस्तावों से अधिक चर्चा परिषद परिसर के बाहर हुए विवाद की रही। कुछ देर तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा, लेकिन अन्य पार्षदों की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया। हालांकि इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की आंतरिक समन्वय और नामांतरण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह विवाद शहर की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।