नई दिल्ली

Success Story: ऑटो ड्राइवर के बेटे ने IIT मद्रास में बनाई जगह, गंभीर बीमारी के बीच 17 साल के जे. संतोष ने किया कमाल

IIT Madras: जे. संतोष ने तमाम चुनौतियों के बावजूद आईआईटी मद्रास में दाखिला हासिल कर अपनी काबिलियत साबित की है। 90% स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी और सेरेब्रल पाल्सी से जूझते हुए उन्होंने डेटा साइंस में बीएस प्रोग्राम में जगह बनाई है।
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IIT Madras
जे संतोष। फाइल फोटो- आईएएनएस

J Santosh Success Story: अक्सर कहा जाता है कि सपने देखना तो आसान है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलना उतना ही मुश्किल। हालांकि कुछ लोगों के लिए यह रास्ता और भी कठिन हो जाता है, जब वे किसी शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे हों। कुछ ऐसी की कहानी है महज 17 वर्ष के जे. संतोष की। जे. संतोष ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास में जगह बनाई है, लेकिन उनकी इस जर्नी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वे जन्म से ही 90 प्रतिशत स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी (एसएमए) और सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं।

आईआईटी-मद्रास का ट्वीट

बीएस प्रोग्राम में एडमिशन

इसके बावजूद उन्होंने अपने पक्के इरादे से अपनी मंजिल तक की राह बना ली। आईआईटी-मद्रास ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर कर जानकारी दी कि जे. संतोष ने आईआईटी मद्रास के डेटा साइंस और एप्लीकेशन में चार वर्ष के बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) प्रोग्राम में एडमिशन प्राप्त किया है। पिछले वर्ष स्कूल के साथ आईआईटी मद्रास का दौरा न कर पाने के बाद, संतोष ने अब दूसरी कोशिश में क्वालिफायर पास करके इस इंस्टीट्यूट में अपनी जगह बना ली है।

सामान्य परिवार से आते हैं

आईआईटी-मद्रास ने आगे जानकारी दी कि जे. संतोष एक सामान्य परिवार से आते हैं, जहां उनके पिता एक ऑटो ड्राइवर हैं। उनको इस प्रोग्राम के बारे में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' से पता चला। इसके बाद उन्होंने एक ऐसा कोर्स चुना, जिसे ज्यादातर घर से ही किया जा सकता है। 'आईआईटी-मद्रास फॉर ऑल' पहल के जरिए, उन्हें शुरुआती दौर में 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' से आमने-सामने मदद मिलेगी, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ट्रेनिंग भी शामिल है। इसके साथ ही वे उनके पहले वर्ष की ट्यूशन फीस का खर्च भी उठाएंगे।

आईटी सेक्टर में जाने का सपना

आईआईटी-मद्रास ने बताया कि जे. संतोष का लक्ष्य अपनी डिग्री पूरी करना और आईटी सेक्टर में सुनहरा करियर बनाना है। वहीं, आईआईटी-मद्रास में जगह बनाकर जे. संतोष ने यह साबित कर दिया है कि लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता चाहे कितना भी मुश्किल क्यों न हो, अगर इरादा पक्का हो तो उसे हासिल किया जा सकता है।

Updated on:
03 Sept 2026 07:05 pm
Published on:
03 Sept 2026 07:05 pm