
Sonam Wangchuk Latest News: देश की राजधानी का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े सियासी और सामाजिक आंदोलन का केंद्र बन चुका है। जाने-माने पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 25वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। स्थिति की नजाकत को देखते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने वांगचुक से अपना अनशन तुरंत समाप्त करने की भावुक अपील की है। हालांकि, दिपके ने साफ कर दिया कि अनशन खत्म होने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक यह सत्याग्रह जारी रहेगा।
अभिजीत दिपके ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लगातार 25 दिनों तक अन्न-जल का त्याग करने से वांगचुक का शरीर बेहद कमजोर हो चुका है और उनकी जान को गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा, "हम सोनम जी के जज्बे को सलाम करते हैं, लेकिन देश को उनके जैसे दूरदर्शी विचारक की जरूरत है। इसलिए हम उनसे अपना अनशन खत्म करने का अनुरोध कर रहे हैं।"
दिपके ने समर्थकों को आश्वस्त किया कि वांगचुक के अनशन वापस लेने के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अपने सभी कार्यकर्ताओं और आम जनता से अपील की कि विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक और शांतिपूर्ण बना रहे ताकि आंदोलन की पवित्रता और देश की साख पर कोई आंच न आए।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे हैं। इस बार शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधारों से जुड़ी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह विरोध प्रदर्शन केंद्रित हो गया है।
प्रमुख बिंदु:
25 दिन का अनशन: सोनम वांगचुक की सेहत चिंताजनक स्तर पर पहुंची।
मुख्य मांग: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी।
अहिंसक विरोध का संकल्प: शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर धरना जारी रखने का ऐलान।
राजधानी में बढ़ रहे जनसमर्थन और नागरिक समूहों के जुड़ाव से यह साफ है कि जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस बातचीत या आश्वासन नहीं आता, तब तक जंतर-मंतर का यह मंच शांत होने वाला नहीं है। देखना यह होगा कि इस मानवीय अपील के बाद सोनम वांगचुक क्या रुख अपनाते हैं और केंद्र सरकार इस गतिरोध को तोड़ने के लिए क्या कदम उठाती है।