NEET Paper Leak Controversy: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश के 'जेन-जी' युवाओं से संवाद करते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले को केंद्र में रखते हुए केजरीवाल ने देश भर के युवाओं से सड़कों पर उतरकर अपने हक की लड़ाई लड़ने की अपील की है।
Kejriwal on Paper Leak: केजरीवाल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि हर बार पेपर लीक होने के बाद मामला सीबीआई CBI को सौंपकर खानापूर्ति कर दी जाती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब भी किसी को जांच एजेंसियों पर विश्वास है? उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014 के बाद से अब तक देश में करीब 93 बार पेपर लीक हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश मामले भाजपा शासित राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े हैं।
केजरीवाल ने कहा, ‘मैं देश के जेन Z से सीधे बात करने आया हूं। मेरी बात ध्यान से सुनना। हर बार पेपर लीक होता है, हर बार मामला CBI को सौंप दिया जाता है, कुछ गिरफ्तारियां होती हैं और फिर सब छूट जाते हैं। क्या आप लोग ये सब सुन-सुनकर थक नहीं गए?’
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोगों का अब भी CBI पर भरोसा बचा है। केजरीवाल ने दावा किया कि 2017, 2021 और 2024 में भी पेपर लीक हुए, लेकिन जांच एजेंसियां कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकीं। उन्होंने कहा कि 2024 के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने की वजह से उसे जमानत मिल गई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने युवाओं से सीधा सवाल किया, यदि नेपाल और बांग्लादेश का 'जेन-जी' सड़कों पर उतरकर पूरी सत्ता पलट सकता है, तो क्या भारत का युवा वर्ग पेपर लीक में शामिल मंत्रियों को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा सकता? जब उनसे पूछा गया कि क्या वह युवाओं को भड़का रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कर रहे हैं, जो हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने केवल शिक्षा के साथ विदेश नीति के मुद्दे पर भी मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि रूस से गैस लेकर आ रहे एक भारतीय जहाज को केंद्र सरकार ने रोक दिया है। केजरीवाल का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी दबाव के चलते रूस से सस्ता तेल और गैस खरीदने से हिचकिचा रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि पीएम व्यक्तिगत दबाव नहीं झेल पा रहे हैं, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि देश में ऐसे बहादुर लोग मौजूद हैं जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर डटकर जवाब दे सकते हैं।
नीट पेपर लीक को लेकर देश के छात्र और अभिभावक पहले से ही सड़कों पर हैं। ऐसे में केजरीवाल का 'जेन-जी' आंदोलन का यह आह्वान आने वाले दिनों में दिल्ली और देश की राजनीति में एक बड़े टकराव का संकेत दे रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को बिना किसी बाहरी दबाव के फिर से सुचारू किया जाए।