
Money Saving Strategy: अमीर दिखना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है? बेंगलुरु के एक प्रोफेशनल का ऐसा मानना है। उसने यह दावा करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी अनोखी रणनीति शेयर की है। उनका कहना है कि बेहतर मोल-भाव और अनावश्यक खर्च से बचने के लिए उन्होंने Apple के महंगे प्रोडक्ट्स छोड़कर Vivo और ASUS के डिवाइस अपनाए और खुद को साधारण दिखाना शुरू कर दिया। LinkedIn पर की गई उनकी यह पोस्ट अब तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के बीच यह बहस का विषय बन गई है।
बेंगलुरु के प्रोफेशनल मीनांक मिन्नू का दावा है कि बेहतर मोल-भाव के लिए वे जानबूझकर खुद को साधारण या कम संपन्न दिखाते हैं। इसके लिए उन्होंने Apple के प्रोडक्ट्स छोड़कर Vivo और ASUS के डिवाइस अपनाए हैं। उनका मानना है कि जब लोग किसी को अमीर समझते हैं, तो अक्सर सामान और सेवाओं की कीमतें बढ़ाकर बताते हैं।
मीनांक मिन्नू ने LinkedIn पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा, "मैं हमेशा खुद को साधारण और कम संपन्न दिखाने की कोशिश करता हूं। इससे मुझे बेहतर मोल-भाव करने में मदद मिलती है।" उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इस मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है।
मीनांक मिन्नू ने LinkedIn पोस्ट में आगे लिखा, "मैं आज भी 10 साल पुरानी हैचबैक कार चलाता हूं, जो मुश्किल से E20 फ्यूल पर चल पाती है। क्या मैं नई कार खरीद सकता हूं? बिल्कुल। लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं समझते कि जैसे ही आप अमीर दिखने लगते हैं, हर चीज आपके लिए महंगी हो जाती है।"
मिन्नू का दावा है कि लोगों की धारणा का असर रोजमर्रा के खर्चों पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, "₹20 किलो वाले आलू ₹28 में मिलने लगते हैं। ₹500 का ट्रैफिक जुर्माना किसी तरह ₹1,500 तक पहुंच जाता है। ₹200 का मोबाइल बैक कवर iPhone के नाम पर ₹700 में मिलता है। इतना ही नहीं, लोग आपसे ऐसे पैसे भी उधार मांग लेते हैं, जिन्हें लौटाने का उनका कोई इरादा नहीं होता।" उन्होंने आगे लिखा, "लोग सिर्फ आपको जज नहीं करते, बल्कि आपकी आर्थिक हैसियत का भी आकलन करते हैं और उसी के हिसाब से आपके साथ व्यवहार करते हैं।"
हालांकि, मीनांक मिन्नू ने यह भी स्वीकार किया कि "गरीब दिखने" के लिए जिन डिवाइसों को उन्होंने चुना, वे पहले इस्तेमाल किए गए उनके Apple प्रोडक्ट्स से भी महंगे हैं। उन्होंने लिखा, "मजेदार बात यह है कि मेरा Vivo, iPhone से ज्यादा महंगा है और मेरा ASUS, MacBook से भी महंगा है। मेरा मकसद अमीर दिखना नहीं था, बल्कि 'अमीर दिखने' की कीमत चुकाने से बचना था।"
पोस्ट के अंत में मिन्नू ने लिखा, "भारत में कारोबार अक्सर इसी तरह चलता है। असली अमीर लोग Starbucks में नहीं, बल्कि पुराने कैफे में बैठकर करोड़ों की डील करते हैं। गुमनाम रहना एक बड़ी ताकत है। अपने काम से काम रखें, दिखावा कम करें और सादगी से जीवन जिएं। 'अटेंशन टैक्स' किसी और को भरने दें।"