
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में धांधली को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने कहा कि उनका मकसद विद्यार्थियों के हितों की बात करना नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करना है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए छात्रों के मुद्दे को उठाया और राहुल गांधी पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि झारखंड में छात्र शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और अनुशासित तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। वहां कोई अनजान स्रोत से ऑर्डर करके उन्हें बढ़िया खाना नहीं खिला रहा है, न ही उनके बैठने-खड़े होने के लिए शानदार इंतजाम किए जा रहे हैं और न ही वहां पिकनिक जैसा माहौल है। उन्होंने कहा कि वहां मामला सिर्फ पेपर लीक का नहीं है। सरकार के साथ मिलीभगत और सौदेबाजी करके नौकरियां दी जा रही थीं और सरकार उन्हें नियुक्ति पत्र जारी कर रही थी, लेकिन इतने गंभीर मुद्दे पर भी राहुल गांधी को ‘झारखंड के छात्रों की आवाज’ सुनाई नहीं दे रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जो लोग राजस्थान के कोटा से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक दहाड़ते और गरजते थे, वे रांची में चूं तक करते नजर नहीं आ रहे हैं। इससे पता चलता है कि उनका मकसद छात्रों के हितों की बात करना नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को रांची के छात्रों की आवाज इसलिए सुनाई नहीं दे रही है, क्योंकि उनके बाईं ओर बहुत तेज आवाज वाले बाहरी ईयरफोन लगे हैं। उन्होंने शायरी के माध्यम से भी राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मैं गांधी से कहना चाहता हूं कि जंतर-मंतर पर कर्म और रांची में जुल्म। राहुल बाबा, ऐसा जुल्म मत कीजिए।
इससे पहले भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने तहलका मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को रेप केस में 10 साल की सजा सुनाए जाने पर कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद के महामेरु पर वार बहुत ही हल्का था और राष्ट्रवाद को रोकने के लिए साजिशों का तहलका था, जो आज पूरी तरह एक्सपोज हो गया है। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा था कि हाल ही में तहलका मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को मुंबई हाईकोर्ट की गोवा खंडपीठ ने 2013 के बलात्कार के एक मामले में दोषी पाया और उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
उन्होंने कहा कि यह विषय आज इसलिए महत्वपूर्ण है कि इतने दिन गुजर जाने के बाद भी कांग्रेस की तरफ से एक भी शब्द सुनाई नहीं पड़ा है। न किसी विपक्षी की तरफ से, न ही किसी विपक्षी दल की ओर से और न ही स्वयं को नारी हितों का स्वयंभू रक्षक बताने वाले किसी संस्थान की ओर से कुछ सुनाई पड़ा है। यह दर्शाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो या नारी की प्रताड़ना, इन विषयों पर सोच कितनी एकांगी, एकपक्षीय और पूर्वाग्रहग्रस्त है।