delhi news: देश में नाम बदलने की राजनीति तेज हुई। केरल ‘केरलम’, बंगाल ‘बांग्ला’ और दिल्ली ‘इंद्रप्रस्थ’ की मांग, विरासत और पहचान पर बहस शुरू। बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग की है।
delhi news: देश में एक बार फिर राज्यों के नाम बदलने की राजनीति गरमाई है। पहले केरल का नाम ‘केरलम’ कर दिया गया। इसके बाद बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी अपने राज्य का नाम बदलने की आवाज उठाई, और अब देश की राजधानी दिल्ली के नाम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग की है।
पत्र में लिखा है, दिल्ली नाम शहर की गहरी और ज्यादा पुरानी विरासत के बजाय एक सीमित ऐतिहासिक समय को दिखाता है। इसलिए इंद्रप्रस्थ नाम को फिर से रखने से मॉडर्न भारत की राजधानी अपनी पुरानी सभ्यता की नींव से फिर से जुड़ जाएगी। यह इस बात का प्रतीक होगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सीट इंसानियत की सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक की विरासत पर खड़ी है।
केरल का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ किए जाने को मंजूरी मिलने के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव लंबे समय से केंद्र के पास लंबित है, लेकिन उस पर अब तक फैसला नहीं लिया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि जब केरल के नाम बदलने को तुरंत स्वीकृति दी जा सकती है, तो बंगाल के प्रस्ताव को वर्षों तक रोके रखना सही नहीं है।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए केरल का नाम आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ करने की मंजूरी दे दी। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद दी। उन्होंने इसे राज्यवासियों की लंबे समय से उठती मांग को पूरा करने वाला कदम बताया। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णयों में सबसे अहम निर्णय केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करना है। उन्होंने बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद से यह मांग उठती रही है कि राज्य का आधिकारिक नाम उसकी स्थानीय भाषा के अनुरूप होना चाहिए।