
स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की नई दलील
Arvind Kejriwal:दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ एक नया हलफनामा दायर किया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी दोनों केंद्र सरकार के पैनल में वकील के तौर पर शामिल हैं। केजरीवाल का तर्क है कि चूंकि इस मामले में उनके खिलाफ केंद्र सरकार की एजेंसी (CBI) और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पक्ष रख रहे हैं, इसलिए उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है।
आपको बता दें कि 14 अप्रैल की तारीख वाले इस हलफनामे में केजरीवाल ने सूचना के अधिकार (RTI) और सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि ईशान शर्मा (जज के पुत्र) सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के 'ग्रुप ए' पैनल काउंसिल हैं और दिल्ली हाई कोर्ट में भी केंद्र के कार्यों के लिए नियुक्त रहे हैं। इतना ही नहीं शांभवी शर्मा (जज की पुत्री) जो कि दिल्ली हाई कोर्ट में सरकारी वकील हैं और सुप्रीम कोर्ट में 'ग्रुप सी' पैनल में शामिल हैं। केजरीवाल ने कहा कि ये पद 'मानद' (Honorary) नहीं हैं, बल्कि ये पेशेवर नियुक्तियां हैं जिनके बदले उन्हें काम, फीस और वित्तीय लाभ मिलता है।
हलफनामे में 2022 के एक सरकारी नोटिफिकेशन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में वकीलों को केस आवंटित करने में सॉलिसिटर जनरल की मुख्य भूमिका होती है। चूंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता खुद सीबीआई की तरफ से पेश हो रहे हैं और केजरीवाल की जमानत का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में यह 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का सीधा मामला बनता है।
इसके साथ ही दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने बताया कि RTI डेटा के जरिए बताया कि जस्टिस शर्मा के बेटे को पिछले कुछ वर्षों में भारी संख्या में सरकारी केस मिले हैं। केजरीवाल ने अपने हलफनामें में दावा किया है कि 2023: 2,487 केस, 2024: 1,784 केस और 2025: 1,633 केस मिले हैं। केजरीवाल का कहना है कि यह आंकड़ा साबित करता है कि केंद्र सरकार के साथ उनका पेशेवर रिश्ता बहुत गहरा और निरंतर है, न कि कोई मामूली संयोग।
केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वे जज की नियत पर सवाल नहीं उठा रहे हैं और न ही उन पर किसी 'वास्तविक पक्षपात' का आरोप लगा रहे हैं। उनका तर्क है कि कानून का सिद्धांत कहता है कि 'न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए'। एक विपक्षी नेता होने के नाते, उन्हें इस स्थिति में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर 'उचित आशंका' है।
Updated on:
15 Apr 2026, 12:02 PM IST
Published on:
15 Apr 2026, 11:08 AM IST
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