नई दिल्ली

दिल्ली में बोरवेल यूजर्स के लिए नया नियम, हर कनेक्शन पर लगेगा वाटर मीटर, इस्तेमाल के हिसाब से बनेगा बिल

Delhi Borewell Policy: दिल्ली सरकार नई बोरवेल पॉलिसी लाने की तैयारी में है। इसके तहत हर बोरवेल पर वाटर मीटर लगाया जाएगा और भूजल के इस्तेमाल के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। साथ ही अवैध बोरवेल को नियमित करने की भी योजना है।
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Delhi Borewell Policy
प्रतीकात्मक तस्वीर

Delhi Groundwater Charges: दिल्ली में जल्द ही बोरवेल से पानी निकालने के नियम पूरी तरह बदल सकते हैं। दिल्ली सरकार नई बोरवेल पॉलिसी तैयार कर रही है, जिसके तहत सभी घरेलू और व्यावसायिक बोरवेल पर वाटर मीटर लगाना अनिवार्य होगा। इसके बाद जितना भी पानी निकाला जाएगा, उसी के हिसाब से बिल का भुगतान करना पड़ेगा। अभी तक बोरवेल के लिए एक बार अनमुति और प्रोसेसिंग फीस देनी होती थी, लेकिन अब नई पॉलिसी के तहत सरकार की पानी के इस्तेमाल के हिसाब से रेगुलर चार्ज करने की तैयारी है।

अवैध बोरवेल वालों को भी मिल सकती है राहत

नई बोरवेल पॉलिसी में सरकार उन लोगों को भी राहत देने की तैयारी में है, जिन्होंने बिना अनुमति बोरवेल लगवाए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि उन अवैध बोरवेल को भी नियमित किया जाए। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में ऐसे बोरवेलों की संख्या काफी ज्यादा है। पिछले साल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को बताया गया था कि 15,962 अवैध बोरवेल सील किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है। ज्यादातर बोरवेल घरों के अंदर होते हैं और इस वजह से उनकी पहचान करना आसान नहीं होता। इसलिए अब सरकार घर-घर जाकर सर्वे कराने का प्लान कर रही है, ताकि पानी के कनेक्शन के साथ-साथ बोरवेल की जानकारी भी इकट्ठा की जा सके।

शुल्क अभी तय नहीं

पुरानी वाली पॉलिसी के तहत लोगों को 500 रुपये प्रोसेसिंग फीस देकर अनुमति लेनी होती है और इसमें यह निगरानी नहीं रखी जाती कि कितना पानी निकाला जा रहा है। अब नई पॉलिसी में यह धायन रखा जाएगा कि कितना पानी निकाला जा रहा है और उसके अनुसार लोगों को भुगतान करना पड़ेगा। सरकार अभी भूजल उपयोग पर लगने वाले शुल्क को लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और पर्यावरण विभाग से सुझाव ले रही है।

बिना अनमुति बोरवेल लगाना है मना

अभी दिल्ली में बिना सरकारी अनुमति के बोरवेल लगाना नियमों के खिलाफ है। इसके लिए पहले आवेदन करना पड़ता है, जिसकी जांच दिल्ली जल बोर्ड, जिला प्रशासन, केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और दूसरे संबंधित विभागों के अधिकारी मिलकर करते हैं। अनमुति सिर्फ उन्हीं इलाकों में दी जाती है, जहां भूजल का स्तर बहुत ज्यादा नीचे नहीं गया है। अधिकारियों का कहना है कि नई नीति का मकसद जरूरतमंद लोगों के लिए अनुमति की प्रक्रिया को आसान बनाना है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि भूजल का इस्तेमाल तय नियमों के अनुसार हो और पानी की बर्बादी पर रोक लगाई जा सके।

Updated on:
11 Jul 2026 10:16 am
Published on:
11 Jul 2026 10:16 am