नई दिल्ली

Delhi rape Case: बिहार की गाड़ी और यूपी के दरिंदे, जिस बस में हुआ गैंगरेप उस पर 80 चालान बाकी

Delhi Bus Gangrape Case: दिल्ली गैंगरेप केस में इस्तेमाल हुई बस बिहार के गोपालगंज में रजिस्टर्ड है और उस पर 80 चालान बकाया थे। यूपी के रहने वाले आरोपियों ने इस ब्लैकलिस्टेड बस में वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच में अब बस के आपराधिक रिकॉर्ड और परमिट की धांधली सामने आ रही है।

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जिस बस में हुआ गैंगरेप उस पर 80 चालान बाकी

Delhi Crime:दिल्ली के रानी बाग इलाके में चलती बस में महिला से हुई दरिंदगी के मामले में अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि जिस प्राइवेट स्लीपर बस में इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया, वह नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सड़कों पर दौड़ रही थी। इस बस का गहरा नाता बिहार से है, जबकि आरोपियों के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े बताए जा रहे हैं।

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गोपालगंज में रजिस्टर्ड है बस, नियमों का हुआ उल्लंघन

दिल्ली पुलिस की जांच का दायरा अब बिहार के गोपालगंज तक पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल की गई यह स्लीपर बस बिहार के गोपालगंज में रजिस्टर्ड है। पुलिस ने वहां के परिवहन विभाग से संपर्क कर बस का पूरा इतिहास खंगाला है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस बस को पहले भी नियमों के उल्लंघन के लिए जब्त किया गया था, लेकिन इसके बावजूद यह दिल्ली और बिहार के बीच धड़ल्ले से चल रही थी।

80 चालान बकाया और 4 लाख का जुर्माना!

बस के रिकॉर्ड को देखकर खुद पुलिस भी हैरान है। सूत्रों के मुताबिक, इस बस पर करीब 80 चालान बकाया थे। पुलिस अब इसकी पुष्टि कर रही है कि क्या इन चालानों की कुल राशि 4 लाख रुपये से अधिक है और क्या इसे बिहार परिवहन विभाग ने 'ब्लैकलिस्ट' कर रखा था। इस बस पर ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार और बिना वैध परमिट के गाड़ी चलाने जैसे कई गंभीर आरोप पहले से दर्ज थे।

टूरिस्ट परमिट के नाम पर 'क्राइम जोन'

यह बस एक निजी संस्था की है और 'टूरिस्ट परमिट' के तहत संचालित हो रही थी। दिल्ली पुलिस अब यह जांच कर रही है कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले ये आरोपी कब से इस बस को चला रहे थे और इनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं।

दिल्ली में प्राइवेट बसों की मनमानी बढ़ी

इस घटना ने दिल्ली में निजी बसों की मनमानी को भी उजागर कर दिया है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 24 मार्च के बीच प्राइवेट बसों के खिलाफ 6,566 चालान जारी किए गए हैं, जो पिछले साल (3,029) की तुलना में 116 फीसदी अधिक हैं। भारी जुर्माने और चालान के बावजूद ऐसी बसें सड़कों पर काल बनकर दौड़ रही हैं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं।

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