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‘वहां सिर्फ 8,000 सिख बचे’ पाकिस्तान में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा तोड़े जाने पर भड़के मनजिंदर सिरसा, भारत ने जताया कड़ा रुख

Pakistan gurdwara demolition- पाकिस्तान के फारूकाबाद में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे के कथित ध्वस्तीकरण के बाद भारत ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और विदेश मंत्रालय ने इसे निंदनीय बताया, जबकि पाकिस्तान सरकार ने पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया।
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Sikh gurdwara demolition Pakistan

पाकिस्तान में लाहौर के पास फारूकाबाद में स्थित लगभग 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को रातों-रात मलबे में तब्दील कर दिया।

Pakistan gurdwara demolition:पाकिस्तान से एक ऐसी खबर आई है जिसने भारत समेत पूरी दुनिया के सिख समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। लाहौर के पास फारूकाबाद में स्थित लगभग 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को रातों-रात मलबे में तब्दील कर दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि एक स्थानीय बिजनेसमैन ने बिना किसी सरकारी अनुमति (एनओसी) के इस घटना को अंजाम दे डाला। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंटवारे के बाद से इस ऐतिहासिक परिसर का एक हिस्सा सूना पड़ा था, जिसका फायदा उठाकर धीरे-धीरे वहां अवैध कब्जा किया गया और दुकानें खड़ी कर दी गईं।

'गुरुद्वारों को निशाना बनाकर बाजारों में बदला जा रहा'

घटना की खबर आग की तरह फैलते ही भारत सरकार और सिख समाज में भारी गुस्सा है। दिल्ली के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर इसे 'घोर पाप' बताया। सिरसा ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि पूरी दुनिया के सामने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का ढोंग करने वाले पाकिस्तान का असली चेहरा फिर बेनकाब हो गया है। वहां गुरुद्वारों को निशाना बनाकर उन्हें धड़ल्ले से बाजारों में बदला जा रहा है। उन्होंने एक घटना साझा करते हुए बताया कि एक गुरुद्वारे के अंदर तो मीट और मुर्गे की दुकान तक खोल दी गई थी। सिरसा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बंटवारे के वक्त पाकिस्तान में लाखों सिख थे, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन की वजह से अब वहां सिर्फ 8,000 के आसपास सिख बचे हैं। उन्होंने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत दखल देने की मांग की है।

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी पाकिस्तान को दो टूक सुनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे सोची-समझी बर्बरता करार दिया। भारत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब इस ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ा जा रहा था, तब स्थानीय प्रशासन और वहां का 'इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' (ETPB) तमाशा देख रहा था। भारत ने साफ कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाना आम हो चुका है। नई दिल्ली ने पाकिस्तान सरकार से इस मामले की तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों को जेल भेजने की मांग की है।

पाकिस्तान सरकार, अब खुद के खर्च पर बनाएगी गुरुद्वारा

भारत के सख्त रवैये और पाकिस्तान में सिखों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद वहां की पंजाब सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत इस पर कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने खुद मौके का मुआयना किया। उन्होंने डैमेज कंट्रोल करते हुए एलान किया है कि सरकार अपने खर्च पर इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे का दोबारा निर्माण कराएगी। फिलहाल, जमीन के मालिकाना हक और इस अवैध तोड़फोड़ की जांच का जिम्मा औकाफ विभाग को सौंप दिया गया है।

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