
दिल्ली हादसे में इकलौत बेटे को खाने के बाद माता-पिता का भावुक वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हैं। फोटो सोर्स-ai generated
Delhi Hit and Run News: 'हमारे पास अब बचा ही क्या है… जो कुछ था वो सब चला गया। हम अंदर से मर चुके हैं… हमारा इकलौता बेटा हमसे छिन गया। अगर वो एक्सीडेंट के बाद उसे सड़क पर तड़पता छोड़ने के बजाय अस्पताल पहुंचा देते, तो शायद आज मेरा बच्चा जिंदा होता।' यह रुंधा हुआ गला और आंखों में आंसू उस बदनसीब पिता के हैं, जिसने अपनी जिंदगी में एक बार फिर सब कुछ खो दिया है।
दिल्ली के राजोकरी फ्लाईओवर पर 25 जून की सुबह हुए एक दर्दनाक हिट-एंड-रन हादसे ने गुरुग्राम के एक कश्मीरी पंडित परिवार को उम्र भर का गम दे दिया है। हादसे में 34 साल के सार्थक मट्टू की मौत हो गई। सार्थक का जन्मदिन आने में महज दो दिन बचे थे, लेकिन घर में केक कटने से पहले ही मातम पसर गया। सोशल मीडिया पर सार्थक के माता-पिता का एक भावुक वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस इस मामले में ढिलाई बरत रही है और रसूखदार आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।
सार्थक मट्टू गुरुग्राम की एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करते थे। 25 जून की सुबह करीब 6:30 बजे वे अपनी बाइक से नोएडा के लिए निकले थे। पिता सुरेंद्र मट्टू बताते हैं कि उन्होंने बेटे की सुरक्षा के लिए बहुत महंगा हेलमेट खरीदा था और वह उसे हमेशा पहनता था। उस सुबह भी सार्थक ने हेलमेट पहना था, लेकिन पीछे से आ रही तेज रफ्तार महिंद्रा थार ने उनकी बाइक को ऐसी टक्कर मारी कि हेलमेट भी सार्थक की जान नहीं बचा सका। टक्कर मारने के बाद थार सवार मौके से भाग निकला। एक राहगीर ने किसी तरह सार्थक का फोन उनके ही फिंगरप्रिंट से अनलॉक किया और दफ्तर के साथियों को खबर दी, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही सार्थक ने दम तोड़ दिया।
सार्थक के पिता ने रोते हुए बताया कि वे कश्मीरी पंडित हैं। साल 1990 के दौर में कश्मीर में उनका घर जला दिया गया था। उस सदमे को उनका परिवार झेल नहीं पाया और सार्थक के दादा-दादी का निधन हो गया। इसके बाद वे लोग दिल्ली-एनसीआर आए और जैसे-तैसे जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाए। उन्हें क्या पता था कि जिस इकलौते बेटे के सहारे वे आगे बढ़ रहे थे, उसे दिल्ली की सड़कें लील जाएंगी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि एक्सीडेंट के करीब 50 घंटे बाद आरोपियों के ब्लड सैंपल लिए गए। परिवार का सवाल है कि अगर आरोपी नशे में थे, तो दो दिन बाद भला अल्कोहल की पुष्टि कैसे होगी? पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना में शामिल थार गाड़ी कर्नाटक की एक कंपनी के नाम पर है, जिसे सागर साहा नाम के शख्स ने लीज पर लिया था। हादसे के वक्त गाड़ी अपूर्व सिंह (30) चला रहा था। पुलिस ने उसे 27 जून को गिरफ्तार तो किया, लेकिन उसे तुरंत जमानत मिल गई। फिलहाल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है। पीड़ित परिवार ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से न्याय की गुहार लगाई है।
Updated on:
02 Jul 2026 01:19 pm
Published on:
02 Jul 2026 01:19 pm
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