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Ram Mandir Theft: अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर दागे तीखे सवाल, बोले- मास्टरमाइंड को बचाने के लिए बनाई गई SIT

Arvind Kejriwal Ram Mandir Statement: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान। केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर साधा निशाना, लगाया असली 'मास्टरमाइंड' को बचाने और एसआईटी (SIT) जांच के नाम पर गुमराह करने का आरोप।
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Arvind Kejriwal Ram Mandir Statement

अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर दागे तीखे सवाल

Ram Mandir Chadhawa Chori Scam: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को अयोध्या के श्री राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इस पूरे घोटाले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों (प्यादों) पर कार्रवाई करके जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है, जबकि असली और प्रभावशाली दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने करोड़ों राम भक्तों की आस्था का हवाला देते हुए इस मामले में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

'प्रधानमंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकते'

केजरीवाल ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करते हुए कहा कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट का गठन और उसके सभी सदस्यों का चयन स्वयं प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ है। ऐसे में यदि मंदिर के भीतर से चोरी और अनियमितता की खबरें आ रही हैं, तो सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बिल्कुल भी पल्ला नहीं झाड़ सकती। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेते हुए इसे एक गंभीर प्रशासनिक विफलता करार दिया और सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी गड़बड़ी की जानकारी सरकारी जांच एजेंसियों को पहले से नहीं थी? और यदि थी, तो समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?

कमीशनखोरी और सीसीटीवी फुटेज हटाने के गंभीर आरोप

आप प्रमुख ने मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन से जुड़े कई अन्य सनसनीखेज आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान ठेकेदारों से भारी कमीशन मांगने और सबूतों को मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) तक हटाए जाने जैसी गंभीर बातें सामने आ रही हैं। केजरीवाल के अनुसार, यह सिर्फ पैसों की हेराफेरी का मामला नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की पवित्र आस्था के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है, जिसके बावजूद जिम्मेदार बड़े पदाधिकारियों पर अब तक कोई आंच नहीं आई है।

'2021 के भूमि विवाद की तरह मामले को दबाने की कोशिश'

पूर्व मुख्यमंत्री ने साल 2021 में हुए विवादित भूमि सौदों की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी करोड़ों रुपये की जमीन को महज कुछ मिनटों के भीतर बेहद महंगे दामों पर ट्रस्ट को बेच दिया गया था। उस वक्त भी जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, लेकिन उस एसआईटी की रिपोर्ट का आज तक क्या हुआ, किसी को नहीं पता। मामला पूरी तरह रफा-दफा कर दिया गया।

SIT की भूमिका पर उठाए बड़े सवाल

मौजूदा जांच प्रक्रिया और एसआईटी की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त करते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह पूरी कवायद केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में अब तक जिन चंद लोगों को पकड़ा गया है, उनके खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से रिमांड तक नहीं मांगी है। इससे साफ पता चलता है कि पुलिस और प्रशासन की इस घोटाले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोई वास्तविक मंशा ही नहीं है।'

केजरीवाल ने अंत में केंद्र सरकार से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) का दावा करने वाली सरकार आखिर किन प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दे रही है? उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए और दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाए।

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