
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट से मुख्य सचिव को दिल्ली विधानसभा समितियों के समक्ष पेश होने से छूट के मामले में कोई राहत नहीं मिली। दरअसल मंगलवार को मुख्य सचिव अंशु प्रकाश दिल्ली विधानसभा समितियों के समक्ष पेश होने से छूट मांगने के लिए अदालत पहुंचे थे लेकिन वहां कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने सुनवाई करते हुए अपने आदेश को फिर से दोहराया है जिसमें दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को समितियों के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए थे। बता दें कि मंगलवार को हुई सुनवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में विधानसभा समितियों के सामने पेश होने के अपने फैसले को बरकरार रखा है। इससे पहले बीते 13 जुलाई को एक अहम फैसला देते हुए कहा था कि मुख्य सचिव समितियों के सामने पेश हों या आवमानना की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहे। इनके अलावे कोर्ट ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश एवं दो अन्य नौकरशाहों को निर्देश देते हुए कहा था कि वे दिल्ली विधानसभा की उन समितियों के समक्ष पेश हों, जिन्होंने उन्हें नोटिस भेजा है।
अदालत ने दिए थे विधानसभा की समितियों के समक्ष पेश होने के आदेश
आपको बता दें कि बीते 13 जुलाई को मामले की सुनवाई करते न्यायाधीश विभू बाखरू ने मुख्य सचिल एवं दो अन्य आईएएस अधिकारियों से कहा था कि यदि वे समितियों के समक्ष पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ अदालत, अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती है। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा, विधानसभा अध्यक्ष एवं दो समितियों के वकील ने अदालत को यह बताया कि तीनों अधिकारी न तो समिति के समक्ष पेश हो रहे हैं और ना ही उनके द्वारा मांगी गई सूचनाओं पर कोई जवाब दे रहे हैं। इस पर अदालत ने सख्त रूख अपनाते हुए मुख्य सचिव समेत दो अन्य आईएएस अधिकारियों को यह आदेश दिए थे।
दिल्ली सरकार का आरोप
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था कि कोई भी अधिकारी दिल्ली सरकार को काम करने में सहयोग नहीं कर रहे हैं। सरकार ने कहा था कि जब अधिकारियों से वित्त से लेकर डाटा रिपोर्ट तक की कोई भी जानकारी मांगी जाती है तो वे यह कहकर कुछ भी बताने से इन्कार कर देते हैं कि वे सर्विस नियम के मुताबिक काम कर रहे हैं। इस पर अदालत ने साफ-साफ कहा कि अधिकारियों को विधानसभा समितियों के सामने पेश होना होगा और उनके सभी सवालों का जवाब देना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कोर्ट अवमानना की नोटिस जारी करेगी।